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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों ने लगाए 'हर हर महादेव' और 'ऊं नमः शिवाय' के जयकारे

उज्जैन, 24 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मंगलवार को बारह ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से भक्तों का सैलाब उमड़ता दिखाई दिया। सुबह के दौरान बाबा के दिव्य शृंगार और विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती देखने के लिए श्रद्धालु देर रात से लंबी कतारों में लगे हुए थे। वे बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन करने और उनकी भस्म आरती देखने के लिए उतावले नजर आ रहे थे।
 
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों ने लगाए 'हर हर महादेव' और 'ऊं नमः शिवाय' के जयकारे

उज्जैन, 24 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मंगलवार को बारह ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से भक्तों का सैलाब उमड़ता दिखाई दिया। सुबह के दौरान बाबा के दिव्य शृंगार और विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती देखने के लिए श्रद्धालु देर रात से लंबी कतारों में लगे हुए थे। वे बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन करने और उनकी भस्म आरती देखने के लिए उतावले नजर आ रहे थे।

परंपरा के अनुसार, सुबह भोर में सबसे पहले बाबा महाकाल मंदिर के पट खुले। सुबह-सुबह ही कई सारे श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होते हुए दिखाई दिए। उन्होंने सुबह-सुबह भगवान के दर्शन किए और पवित्र पूजा विधियों को देखा।

यह आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा का हिस्सा मानी जाती है। भक्तों ने बड़ी श्रद्धा से भगवान के दर्शन किए और आरती के दौरान पूजा विधि को बड़े मन से देखा। यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा करवाई जाती है।

मंदिर के पट खुलने के बाद गर्भगृह में पूजा शुरू हुई। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें बाबा निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।

हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन करने और उनकी भस्म आरती देखने के लिए उतावला था। भस्म आरती के दौरान मंदिर का माहौल पूरी तरह भक्ति से भर गया। भक्तों ने 'हर हर महादेव' और 'ऊं नमः शिवाय' के जयकारे लगाए। भस्म आरती के दौरान बाबा को देखने की खुशी श्रद्धालुओं के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी।

भस्म आरती के बाद महाकाल का दिव्य शृंगार देखने को मिला, जिसमें सबसे पहले बाबा को चंदन से शृंगार किया गया व माथे पर चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला अर्पित की गई। इसके बाद महाकाल की कपूर आरती होती है और उसके बाद उन्हें भोग लगाया जाता है। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है।

--आईएएनएस

एनएस/वीसी