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सीईसी ज्ञानेश कुमार के फैसले पर सवाल: मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप, जांच की मांग

नई दिल्ली 25 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों और मुंबई के पवई इलाके में मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले को लेकर वकीलों ने अदालत का रुख किया। अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाते हुए मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मुंबई की एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर रोक को लेकर अधिवक्ता वीर कंकारिया ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी दी।
 

नई दिल्ली 25 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों और मुंबई के पवई इलाके में मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले को लेकर वकीलों ने अदालत का रुख किया। अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाते हुए मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मुंबई की एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर रोक को लेकर अधिवक्ता वीर कंकारिया ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी दी।

अधिवक्ता शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से अल्पमत के आधार पर की गई प्रक्रिया पूरी तरह कानून के खिलाफ है। यह संविधान में दिए गए प्रावधानों और जनप्रतिनिधित्व कानून के दायरे के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से मतदाताओं के नाम हटाने और फॉर्म में अलग से जोड़े गए आवेदन और नए मानदंडों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी नए मानदंड का कानूनी आधार होना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं था। चुनाव आयोग, विशेष रूप से ज्ञानेश कुमार ने बिना निर्धारित सहमति और प्रक्रिया का पालन किए मनमाने तरीके से यह कदम उठाया। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने ईसीआई एनईटी को भी चुनौती दी है, शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने इसे भी चुनौती दी है। उनका कहना था कि अपनाई गई प्रक्रिया कानून के अनुसार केंद्रीकृत नहीं थी।

त्रिपाठी ने कहा कि नामों को जोड़ने या हटाने का अधिकार निचले स्तर पर था, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरी तरह केंद्रीकृत कर दिया गया। मतदाताओं को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया अपनाई गई। इससे संबंधित मांगें अदालत के सामने रखी गई हैं।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग से जुड़े सवाल पर त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है। यह जांच इस बात को तय करने के लिए होनी चाहिए कि क्या संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के खिलाफ जाकर कोई कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यदि कानून के दायरे से बाहर जाकर काम किया गया है तो उसकी जांच जरूरी है। उन्होंने मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। त्रिपाठी ने उम्मीद जताई कि इस मामले में अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है।

मुंबई के पवई इलाके में स्थित एक मस्जिद के मामले में अधिवक्ता वीर कंकारिया ने बताया कि उनकी याचिका का मुख्य उद्देश्य ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगवाना था। उन्होंने बताया कि यह करीब 75 साल पुराने ट्रस्ट से जुड़ी मस्जिद का मामला है। पुनर्विकास परियोजना के तहत बिल्डर मस्जिद से जुड़े लोगों को 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करना चाहता था, लेकिन मस्जिद पक्ष को इसकी शर्तें और नियम स्वीकार नहीं थे। इसके बाद उन्होंने पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी।

उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट से स्टे नहीं मिलने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है और महाराष्ट्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है।

--आईएएनएस

पीएसके