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सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में केंद्रीय विद्यालय टॉप पर, विदेशों के रिजल्ट में गिरावट

नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में इस वर्ष 85.20 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। हालांकि, संस्थानवार स्कूलों के प्रदर्शन की बात करें तो इसमें केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों ने एक बार फिर सबसे बेहतर परिणाम दिए हैं। केंद्रीय विद्यालय इस लिस्ट में टॉप पर हैं। केंद्रीय विद्यालयों का उत्तीर्णता प्रतिशत 98.55 रहा, वहीं मामूली अंतर के साथ जवाहर नवोदय विद्यालयों का परिणाम 98.47 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
 
सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में केंद्रीय विद्यालय टॉप पर, विदेशों के रिजल्ट में गिरावट

नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में इस वर्ष 85.20 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। हालांकि, संस्थानवार स्कूलों के प्रदर्शन की बात करें तो इसमें केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों ने एक बार फिर सबसे बेहतर परिणाम दिए हैं। केंद्रीय विद्यालय इस लिस्ट में टॉप पर हैं। केंद्रीय विद्यालयों का उत्तीर्णता प्रतिशत 98.55 रहा, वहीं मामूली अंतर के साथ जवाहर नवोदय विद्यालयों का परिणाम 98.47 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

इनके अलावा, सरकारी विद्यालयों में उत्तीर्णता प्रतिशत 89.55 रहा। सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों ने 86.07 प्रतिशत परिणाम दिया, जबकि एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का परिणाम 85.55 प्रतिशत रहा। स्वतंत्र विद्यालयों (इंडिपेंडेंट स्कूल) की बात करें इनका कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 84.20 दर्ज किया गया है। वहीं, विदेशों में संचालित सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के परिणाम में इस वर्ष गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2026 में विदेशी स्कूलों का कुल उत्तीर्णता प्रतिशत 90.50 प्रतिशत रहा। यह पिछले वर्ष 95.01 प्रतिशत था यानी इस साल का औसत रिजल्ट बीते साल के मुकाबले कम है।

बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में विदेशों में कुल 24,047 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 24,009 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 21,728 विद्यार्थी परीक्षा में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हुए। वहीं, वर्ष 2025 में 21,825 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 21,782 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 20,694 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की थी। उस वर्ष उत्तीर्णता प्रतिशत 95.01 रहा था। आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष परीक्षार्थियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन पासिंग प्रतिशत में लगभग 4.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित रही। इसका असर परिणामों पर दिखाई दे सकता है। बोर्ड ने इस वर्ष कक्षा 12 उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली लागू की थी, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने का प्रयास किया गया है। वहीं, शिक्षकों ने ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को बड़ा सुधार बताया है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2026 की कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में पहली बार पूर्ण स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली लागू की है। बोर्ड के मुताबिक, इस नई डिजिटल व्यवस्था को देशभर के शिक्षकों और परीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। शिक्षकों का मानना है कि यह पहल परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

बोर्ड के अनुसार, ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हुई है और परिणाम अधिक विश्वसनीय बने हैं।

बोर्ड के मुताबिक, शिक्षकों ने कहा कि डिजिटल प्रणाली के कारण अंक जोड़ने, अंक चढ़ाने या कुल योग में होने वाली गलतियों की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। इससे विद्यार्थियों के प्रदर्शन का सही आकलन सुनिश्चित हुआ है। कई परीक्षकों ने इसे गुणवत्तापूर्ण और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

परीक्षकों का कहना है कि ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया में हर गतिविधि रिकॉर्ड होती है, जिससे किसी प्रकार की अनदेखी या त्रुटि की गुंजाइश कम रहती है। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी