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सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से मिला न्याय....गुरनाम सिंह के भाई ने सुनाया 32 साल पुराना दर्द

तरनतारन, 7 जुलाई (आईएएनएस)। तरनतारन के गुरनाम सिंह फर्जी एनकाउंटर मामले में 32 साल बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से परिवार को न्याय मिला गया है लेकिन अब भी परिवार उस घटना को भुला नहीं पाया है। गुरनाम सिंह के भाई सोहन सिंह ने उस दर्दनाक दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे उनके 18-19 वर्षीय भाई को घर से उठाकर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था।
 

तरनतारन, 7 जुलाई (आईएएनएस)। तरनतारन के गुरनाम सिंह फर्जी एनकाउंटर मामले में 32 साल बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट से परिवार को न्याय मिला गया है लेकिन अब भी परिवार उस घटना को भुला नहीं पाया है। गुरनाम सिंह के भाई सोहन सिंह ने उस दर्दनाक दौर को याद करते हुए बताया कि कैसे उनके 18-19 वर्षीय भाई को घर से उठाकर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था।

सोहन सिंह ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "अगर हम 30–32 साल पहले की बात करें, तो तब पंजाब में आतंकवाद का काला दौर अपने चरम पर था। उस समय हमारे परिवार को भी भारी दुख झेलना पड़ा। मेरा छोटा भाई उस समय लगभग 18-19 साल का था। उसने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पंजाब होमगार्ड्स में होम गार्ड जवान के रूप में नौकरी शुरू की थी। पंजाब होमगार्ड्स में सेवा करने के बावजूद पंजाब पुलिस उसे रात के समय हमारे घर से उठा ले गई। उसे करीब 7-8 दिनों तक सिटी थाने में रखा गया और फिर आठ दिन बाद उसका फर्जी एनकाउंटर कर दिया गया।"

उन्होंने बताया, "उस समय के थाना प्रभारी गुरबचन सिंह और उनके साथ हंसराज व रेशम सिंह ने मिलकर झूठा पुलिस मुकाबला दिखाया। उन्होंने हमारे भाई का अंतिम संस्कार भी हमें बिना बताए श्मशान घाट में कर दिया। हमें उसका अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिया। हम उस काले दौर से गुजरे हैं, जब आतंकवाद के नाम पर अनेक परिवारों ने अपनों को खोया। उस समय कई नौजवानों को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ों में मारकर अपनी तरक्कियां हासिल कीं।"

सोहन सिंह ने कहा, "आज जो फिल्म उस दौर की घटनाओं को दिखाती है और लोगों को उसके बारे में जागरूक करती है, उस पर भी सरकार ने प्रतिबंध लगाकर गलत किया है।"

उन्होंने कहा, "हमें अपने भाई के लिए इंसाफ चाहिए था। इस लड़ाई में खालड़ा मिशन कमेटी ने हमारा साथ दिया। सीबीआई ने मामले की जांच की और चंडीगढ़ की सीबीआई अदालत में केस दर्ज किया। करीब 32 वर्षों तक इस मामले की सुनवाई चली। आखिरकार, 32 साल बाद अदालत ने दोषी पुलिसकर्मियों को 20-20 साल की सजा और जुर्माना सुनाया।"

सोहन सिंह ने कहा, "इस फैसले से हमारे मन को कुछ शांति मिली कि दोषी पुलिसकर्मियों को उनके अपराध की सजा मिली। उन्होंने झूठे पुलिस मुकाबले दिखाकर अपनी तरक्कियां हासिल कीं और न जाने कितने परिवारों को उजाड़ दिया। हमें 32 साल बाद सही मायनों में इंसाफ मिला है।"

--आईएएनएस

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