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ब्रिटेन में भीषण गर्मी का कहर: 38 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान, सरकार ने बुलाई आपात बैठक

लंदन, 12 अगस्त (आईएएनएस)। ब्रिटेन इस समय भीषण गर्मी, सूखे और जंगलों में बढ़ती आग की तिहरी चुनौती से जूझ रहा है। मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए ‘एक्सट्रीम हीट’ की चेतावनी जारी की है। आने वाले दिनों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने बुधवार को सरकार की आपातकालीन समिति कोबरा की बैठक बुलाई है।
 

लंदन, 12 अगस्त (आईएएनएस)। ब्रिटेन इस समय भीषण गर्मी, सूखे और जंगलों में बढ़ती आग की तिहरी चुनौती से जूझ रहा है। मौसम विभाग ने कई इलाकों के लिए ‘एक्सट्रीम हीट’ की चेतावनी जारी की है। आने वाले दिनों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने बुधवार को सरकार की आपातकालीन समिति कोबरा की बैठक बुलाई है।

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिणी और पूर्वी इंग्लैंड तथा मिडलैंड्स के कुछ हिस्सों में गर्मी सबसे ज्यादा परेशान कर सकती है। इंग्लैंड के कई हिस्सों में पहले से ही एम्बर हीट-हेल्थ अलर्ट लागू है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों, खासकर बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील लोगों से गर्मी के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है।

यह 2026 की ब्रिटेन में पांचवीं हीटवेव है और मौसम विभाग के मुताबिक इस साल की गर्मी अब तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। इस साल अब तक 30 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाले 35 दिन दर्ज किए जा चुके हैं।

गर्मी का असर सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है। लंबे समय से जारी सूखे ने जल संकट को गंभीर बना दिया है और जंगलों में आग का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इंग्लैंड और वेल्स में इस साल अब तक 966 जंगलों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें अगस्त के शुरुआती 10 दिनों में ही 185 घटनाएं हुईं।

द गार्डियन के अनुसार, सरकार की कोबरा बैठक में गर्मी, जंगल की आग, पानी की उपलब्धता और आपात सेवाओं पर बढ़ते दबाव से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी। सरकार ने अग्निशमन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 9.7 करोड़ पाउंड की अतिरिक्त सहायता का भी ऐलान किया है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सूखे की वजह से लाखों लोग पानी की पाबंदियों के दायरे में हैं। रॉयटर्स के मुताबिक करीब 4.5 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं जिन्हें सूखे से प्रभावित माना गया है, जबकि करीब 2.7 करोड़ लोगों पर पानी से जुड़ी पाबंदियों का असर है।

लगातार गर्म और शुष्क मौसम ने किसानों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। जल स्रोतों का स्तर गिर रहा है और कई क्षेत्रों में खेती पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के सामने तत्काल गर्मी और आग से निपटने के साथ-साथ पानी और जलवायु लचीलेपन की लंबी अवधि की रणनीति तैयार करने की चुनौती भी है।

--आईएएनएस

केआर/