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‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ है वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र: शिवराज सिंह चौहान

इंदौर, 13 जून (आईएएनएस ) मध्य प्रदेश की व्यापारी नगरी इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन एक सर्वसम्मत ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ पारित किए जाने के साथ हुआ। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इंदौर डिक्लेरेशन वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र है।
 
‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ है वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र: शिवराज सिंह चौहान

इंदौर, 13 जून (आईएएनएस ) मध्य प्रदेश की व्यापारी नगरी इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों का समापन एक सर्वसम्मत ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ पारित किए जाने के साथ हुआ। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इंदौर डिक्लेरेशन वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 दिन तक चले कृषि मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय कृषि मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए संवाददाता को बताया कि वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों की यह बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश लेकर आई है।

उन्‍होंने अपने सहयोगी मंत्रियों रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी की उपस्थिति में कहा कि कृषि समूह की मंत्री स्तरीय तथा उससे पहले अधिकारी स्तरीय, दोनों बैठकें सार्थक और सफलतापूर्वक संपन्न हुई हैं।

उन्होंने बताया कि सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित कुल लगभग 100 प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के प्रश्न पर ब्रिक्स देशों के बीच कितना गहरा जुड़ाव और गंभीरता है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, इनके पास वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व के खाद्यान्न उत्पादन में भी लगभग 42 प्रतिशत योगदान इन्हीं देशों का है, इसलिए इनकी सामूहिक आवाज वैश्विक मंच पर एक प्रभावी शक्ति के रूप में उभरी है।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में चार प्रमुख प्राथमिकताओं दुनिया और ब्रिक्स देशों की खाद्य सुरक्षा (फूड सिक्योरिटी) और पौष्टिक आहार पर गहन विमर्श हुआ। व्यापक विचार-विमर्श के बाद जो संयुक्त घोषणा पत्र तैयार हुआ, उसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया और इंदौर में अपनाए जाने के कारण इसे ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के नाम से जाना जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस घोषणा पत्र का केंद्र किसान है, किसान को केंद्र में रखकर खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, क्लाइमेट रेजिलिएंट खेती और सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता इस डिक्लेरेशन में दर्ज की गई है।

चौहान ने कहा कि यह दस्तावेज केवल सहमति का कागज नहीं है, बल्कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति, साझा उत्तरदायित्व और कृषि को माध्यम बनाकर अधिक सुरक्षित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य गढ़ने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सदस्य देशों ने तय किया है कि इंदौर डिक्लेरेशन में दर्ज सभी पहलों को ज़मीन पर उतारने के लिए मिलकर, सामूहिक और सतत प्रयास किए जाएंगे, ताकि इसके लाभ वास्तविक रूप से किसानों, ग्रामीण समुदायों और खाद्य प्रणालियों तक पहुंच सकें।

--आईएएनएस

एसएनपी/डीकेपी