ब्रिक्स घोषणापत्र पर सहमति बड़ी उपलब्धि, पश्चिम एशिया और यूक्रेन का हल अमेरिका पर निर्भर : केपी फैबियन
नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति को विदेश मामलों के विशेषज्ञ केपी फैबियन ने बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे तनाव के बीच घिरे देशों के बावजूद साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना अहम है, लेकिन पश्चिम एशिया और यूक्रेन जैसे वैश्विक संघर्षों का समाधान ब्रिक्स से नहीं, बल्कि अमेरिका की सीधी कूटनीति और राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों पर निर्भर करेगा।
केपी फैबियन ने कहा, "भारत की अध्यक्षता में एक घोषणापत्र जारी करने में सफलता मिली है, जिस पर सभी ब्रिक्स देश सहमत हुए हैं। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें ईरान भी शामिल था, जिस पर फरवरी में इजरायल और अमेरिका ने हमला किया था और अमेरिका ने उसके खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए हैं। इसके अलावा इसमें संयुक्त अरब अमीरात भी था, जिस पर ईरान ने हमला किया था। ईरान भले ही कहे कि उसने सिर्फ अमेरिकी ठिकानों और संबंधित सुविधाओं को निशाना बनाया, लेकिन यह यूएई पर हमला ही था।"
उन्होंने कहा कि इसमें सऊदी अरब भी शामिल था। सऊदी अरब के संदर्भ में अहम बात यह है कि उसी दिन हूती विद्रोहियों ने तेल संयंत्रों पर हमला किया था। इसके बाद इराक से किसी अज्ञात प्रतिरोध समूह ने पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया। इराक ने सऊदी अरब से जवाबी कार्रवाई न करने को कहा और सऊदी अरब इसके लिए राजी हो गया, जो बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा सऊदी अरब के मोहम्मद बिन सलमान ने राष्ट्रपति ट्रंप से हूती विद्रोहियों पर हमले में साथ देने का अनुरोध किया था, लेकिन ट्रंप ने इनकार कर दिया। इससे यह समझना जरूरी है कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देश इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि मौजूदा हालात में कूटनीति और संवाद ही जरूरी है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार कहा है। सोमवार को जीसीसी, ईरान और इराक ओमान में होर्मुज स्ट्रेट तक पहुंच को लेकर क्या व्यवस्था बनाई जा सकती है, इस पर चर्चा के लिए मिल रहे हैं, यानी कूटनीति सक्रिय है। लेकिन सवाल यह है कि ट्रंप क्या चाहते हैं? क्या वह और ज्यादा आर्थिक विकास चाहते हैं?
विशेषज्ञ फैबियन ने कहा कि ईरानी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना और आगे हमले करना, क्या होगा यह कहा नहीं जा सकता। जीसीसी देश शांति और संवाद चाहते हैं। अगर पश्चिम एशिया की स्थिति को देखें तो ब्रिक्स घोषणापत्र के आधार पर कोई समाधान नहीं निकलने वाला। समाधान तभी संभव है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधी राजनयिक बातचीत हो और यह मुख्य रूप से अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर करता है। वहीं, ईरान में कुछ वर्ग यह भी कह रहे हैं कि अमेरिका को हमला करने दो, हम इसे झेल लेंगे।
उन्होंने कहा कि हमें कूटनीतिक वार्ता में जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है, मैं इस स्थिति से बहुत खुश नहीं हूं, लेकिन हालात यही हैं। यूक्रेन के मामले में भी ब्रिक्स घोषणापत्र से कुछ होने वाला नहीं है। यूक्रेन का हल भी मूल रूप से राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति पुतिन की सहमति पर निर्भर करता है और मेरा मानना है कि एक बार जब दोनों सहमत हो जाएंगे तो राष्ट्रपति जेलेंस्की को झुकना होगा।
--आईएएनएस
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