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ब्रेक्सिट के एक दशक बाद ईयू में वापसी की बहस तेज, टोनी ब्लेयर ने 10 साल का रोडमैप सुझाया

लंदन, 24 सितंबर (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने के करीब एक दशक बाद ब्रिटेन में फिर से यूरोप की ओर लौटने की बहस तेज होती दिख रही है। पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि ब्रिटेन को अगले 10 वर्षों में यूरोपीय संघ में दोबारा शामिल होने की दिशा में काम करना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की सरकार पर भी ब्रेक्सिट के भविष्य को लेकर रुख स्पष्ट करने का दबाव बढ़ रहा है।
 

लंदन, 24 सितंबर (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होने के करीब एक दशक बाद ब्रिटेन में फिर से यूरोप की ओर लौटने की बहस तेज होती दिख रही है। पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि ब्रिटेन को अगले 10 वर्षों में यूरोपीय संघ में दोबारा शामिल होने की दिशा में काम करना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की सरकार पर भी ब्रेक्सिट के भविष्य को लेकर रुख स्पष्ट करने का दबाव बढ़ रहा है।

ब्लेयर के नेतृत्व वाले 'टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट' की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन को अगले दशक में एक ऐसे सुधार किए हुए ईयू में दोबारा शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए, जो बदलती वैश्विक परिस्थितियों के हिसाब से हो। ब्लेयर ने कहा, " ब्रिटेन को यूरोप के साथ अपने भविष्य के संबंधों को केवल इस सवाल के रूप में नहीं देखना चाहिए कि क्या वह ब्रेक्सिट को पलट रहा है, बल्कि यह देखना चाहिए कि मौजूदा राष्ट्रीय हितों के लिए यूरोप के साथ किस तरह का संबंध सबसे उपयुक्त होगा।"

ब्लेयर ने सरकार से यह भी कहा है कि उसे यूरोपीय संघ के साथ औपचारिक संबंध फिर से बनाने की इच्छा स्पष्ट रूप से सामने रखनी चाहिए। हालांकि, उनके प्रस्ताव में वापसी की शर्त यह है कि ईयू भी खुद को सुधारने की दिशा में आगे बढ़े। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन को ऐसी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार रहना चाहिए, जिसमें भविष्य के संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत हो और अंतिम समझौता होने तक कुछ भी तय न माना जाए।

इस प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ब्रिटेन को ईयू की सदस्यता के साथ आने वाली कुछ पुरानी व्यवस्थाओं को भी स्वीकार करना पड़ सकता है। ब्लेयर के थिंक टैंक ने संकेत दिया है कि फ्री मूवमेंट और ईयू के लिए वित्तीय योगदान जैसे मुद्दों पर ब्रिटेन को रियायत देनी पड़ सकती है। साथ ही रिपोर्ट ने ईयू के भीतर सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया है।

इस समय ब्रिटेन और ईयू के बीच संबंधों को सुधारने की कोशिश पहले से जारी है। सरकार ने ब्रेक्सिट के बाद यूरोपीय देशों के साथ व्यापार, सुरक्षा, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश की है। ब्रिटेन यूरोपीय संघ के कुछ कार्यक्रमों में भी फिर शामिल हो रहा है, जबकि युवाओं की आवाजाही और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी है।

लेकिन ईयू में दोबारा शामिल होना केवल ब्रिटेन के फैसले से संभव नहीं होगा। ब्रसेल्स और यूरोपीय सदस्य देशों की सहमति भी जरूरी होगी। यूरोपीय संघ की ओर से पहले ही संकेत दिए जाते रहे हैं कि अगर ब्रिटेन दोबारा सदस्यता चाहता है तो उसे अन्य सदस्य देशों की तरह नियमों और दायित्वों को स्वीकार करना पड़ सकता है। पुराने दौर में ब्रिटेन को मिली कुछ विशेष छूट और बजट संबंधी रियायतें दोबारा मिलेंगी या नहीं, यह भी बड़ा सवाल होगा।

द गार्डियन के अनुसार, ब्रिटेन की घरेलू राजनीति में भी यह मुद्दा आसान नहीं है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल में अगले चुनाव के घोषणापत्र में ईयू सदस्यता के सवाल को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, लेकिन उनका मौजूदा जोर ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच व्यावहारिक संबंध मजबूत करने पर है। लेबर पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय मौजूद हैं।

ब्रेक्सिट को लेकर ब्रिटेन की राजनीति में बदलाव का एक संकेत जनमत सर्वेक्षणों से भी मिलता है। हाल के कुछ सर्वेक्षणों में ईयू के साथ करीबी संबंधों और दोबारा सदस्यता के पक्ष में समर्थन दिखाई दिया है।

2016 के जनमत संग्रह को 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। उस समय ब्रिटेन के मतदाताओं ने ईयू छोड़ने के पक्ष में मतदान किया था और इसके बाद वर्षों तक देश की राजनीति ब्रेक्सिट की शर्तों और उसके प्रभावों के इर्द-गिर्द घूमती रही।

--आईएएनएस

केआर/