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भाजपा नेता ने मौलाना रशीदी की मानसिकता पर उठाए सवाल, भागवत की जेन-जी से बातचीत की सराहना की

जम्मू, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने कांवड़ियों पर मौलाना साजिद रशीदी की टिप्पणी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह मौलाना की घिनौनी मानसिकता है। उन्होंने झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर सीजेपी के शामिल न होने पर पार्टी की मंशा पर सवाल उठाया। साथ ही उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की 'जेन-जी' के साथ बातचीत की सराहना की।
 

जम्मू, 6 अगस्‍त (आईएएनएस)। भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने कांवड़ियों पर मौलाना साजिद रशीदी की टिप्पणी पर पलटवार किया। उन्‍होंने कहा कि यह मौलाना की घिनौनी मानसिकता है। उन्होंने झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर सीजेपी के शामिल न होने पर पार्टी की मंशा पर सवाल उठाया। साथ ही उन्‍होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की 'जेन-जी' के साथ बातचीत की सराहना की।

उन्‍होंने कहा कि मोहन भागवत का यह प्रयास देश ही नहीं, दुनिया के भीतर युवाओं से संवाद का नया मापदंड तय करेगा।

विक्रम रंधावा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि मौलाना रशीदी की घिनौनी मानसिकता है। इन लोगों को यही सब सिखाया और बताया जाता है। देश और दुनिया जानती है कि आतंकवादी की मानसिकता क्‍या होती है। मेरा मानना है कि ईमानदार मुसलमानों को रशीदी के बयान की निंदा करनी चाहिए। इस तरह के लोग इमाम कहलाने के हकदार नहीं हैं।

झारखंड में पेपर लीक होने पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के शामिल नहीं होने पर रंधावा ने उनकी मंशा पर सवाल उठाया है। उन्‍होंने कहा कि सीजेपी के स्‍तर को हर कोई जानता है। मुझे लगता नहीं है कि उनका कोई वजूद है, जो राज्‍यों के अंदर युवाओं की आवाज को मजबूत के साथ उठा सकते हों। सीजेपी एजेंसी द्वारा प्रायोजित है, उनका काम देश की राजधानी में उपद्रव करना, और सरकार को कटघरे में खड़ा करें। ये लोग भूल जाते हैं कि यह नरेंद्र मोदी का भारत है। देश के भीतर अराजकता फैलाने का काम होगा, तो जरूर कार्रवाई होगी।

विक्रम रंधावा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की सराहना करते हुए कहा कि 'जेन-जी' के साथ बातचीत बहुत बेहतरीन प्रयास है। भागवत ने जेन-जी और जेन अल्‍फा को संबोधित करते हुए कहा कि संवाद एक रास्‍ता है। मुंबई में बड़े कार्यक्रम के जरिए हजारों की संख्‍या में छात्रों से जब वह रू-ब-रू होंगे, खुलकर बातें सामने आएंगी। जिस तरह से घर का बड़ा बुजुर्ग बच्‍चों से बात करके वातावरण में क्‍या बदलाव करने चाहिए, यह वही प्रयास है। मुझे लगता है कि देश ही नहीं दुनिया के भीतर युवाओं से संवाद का नया मापदंड तय होगा।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी