चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रवक्ता बन गई है भाजपा, ज्ञानेश कुमार कहां छिपे : प्रियांक खड़गे
कलबुर्गी, 1 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार के मंत्रियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कलबुर्गी में मंत्री प्रियांक खड़गे और रायचूर में मंत्री डॉ. अजय धर्म सिंह ने दिल्ली में हो रही इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर कहा कि यह रैली लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है।
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग के सामने बहुत ही अहम और कानूनी सवाल रखे गए हैं लेकिन आयोग उनका जवाब नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। संसद की निगरानी के बिना फॉर्म-6 की प्रक्रिया को बदलने की अनुमति किसने दी? फॉर्म-7 को इतनी बड़ी संख्या में कैसे बांटा जा रहा है? उन्होंने कहा कि 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, जो कुल पात्र मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत है और मतदाताओं को इसकी जानकारी तक नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह सवाल भी उठता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को न्यायिक छूट की क्या जरूरत है। जब उनसे कानूनी रूप से महत्वपूर्ण सवाल पूछे जा रहे हैं, तो जवाब भाजपा क्यों दे रही है? क्या भाजपा चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रवक्ता बन गई है? ज्ञानेश कुमार कहां छिपे हुए हैं?
प्रियांक खड़गे ने कहा कि अगर बनावटी जनादेश और बनावटी बहुमत के आधार पर सरकारें बनाई जा रही हैं, तो यह संविधान के खिलाफ है और देशद्रोह से कम नहीं है। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर कानून का सामना करना चाहिए।
वहीं, मंत्री डॉ. अजय धर्म सिंह ने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस पार्टी ही नहीं बल्कि पूरे इंडिया गठबंधन के नेता और देशभर से आम नागरिक बड़ी संख्या में जुटे हैं। शहरों और गांवों से लाखों लोग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं क्योंकि देश जानना चाहता है कि एसआईआर के पीछे असली मंशा क्या है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट हो चुका है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस पूरे मामले में शामिल हैं। आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उन्हें क्यों बचा रहे हैं। ज्ञानेश कुमार किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं, न कांग्रेस से, न भाजपा से और न ही अन्य पार्टी से, फिर भी उन्हें बचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने खुद स्पष्ट किया है कि पिछले 10 महीनों में 14 ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिन पर कोई आम सहमति नहीं बनी और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। इतनी गंभीर खामियों के बावजूद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का उन्हें बचाना समझ से परे है।
--आईएएनएस
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