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बिहार: विपक्ष पर बरसे मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, बोले- जनता दोहरे मापदंड को देख रही है

पटना, 12 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार सरकार के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हुए विपक्ष पर जुबानी हमला किया। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब देने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव, एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने, तमिलनाडु विधानसभा के परिसीमन संबंधी प्रस्ताव और झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर प्रतिक्रिया दी।
 

पटना, 12 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार सरकार के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हुए विपक्ष पर जुबानी हमला किया। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब देने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव, एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने, तमिलनाडु विधानसभा के परिसीमन संबंधी प्रस्ताव और झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर प्रतिक्रिया दी।

विपक्ष पर अपरिपक्व राजनीति करने और अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में संसद बहस और विमर्श का सबसे महत्वपूर्ण मंच है और विपक्ष को सवाल उठाने के साथ-साथ सरकार के जवाब को भी सुनना चाहिए।

विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव पर अरुण शंकर प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में विपक्ष की भूमिका निभाने वाले नेताओं में उन्होंने ऐसी अपरिपक्वता पहले कभी नहीं देखी। जब संसद का सत्र चलता है तो विपक्ष के नेता कई बार देश से बाहर दिखाई देते हैं और जब राजनीतिक मुद्दों पर हंगामा होता है, तब वे देश में आकर विरोध करते हैं। जनता विपक्ष के इस रवैये को देख रही है। संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और वहां प्रत्येक विषय पर चर्चा होनी चाहिए। यदि विपक्ष सवाल उठाता है तो सरकार के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या रक्षा मंत्री जवाब देने के लिए सदन में मौजूद होते हैं। ऐसे में सरकार के जवाब देने के समय विपक्ष द्वारा बहिष्कार करना सवाल खड़े करता है। सवाल पूछना और उसके जवाब से बचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। जनता इस पूरे घटनाक्रम को देख रही है और चुनावों में इसका प्रभाव दिखाई देता है।

मंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश लंबे समय तक माओवाद और नक्सली हिंसा जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझता रहा है। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को लेकर दृढ़ संकल्प के साथ काम किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। जो लोग जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से संसद में हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार रहते हैं। इसलिए विपक्ष को भी संसद में रहकर सवाल और जवाब की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए।

झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी की चुप्पी पर भी मंत्री ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होता है तो विपक्षी दल उसे लेकर काफी मुखर दिखाई देते हैं। लेकिन, जब इसी तरह का विरोध-प्रदर्शन झारखंड में होता है, जहां विपक्षी दलों के सहयोग से सरकार चल रही है, तो उनका रवैया अलग दिखाई देता है। जनता विपक्ष के इस कथित दोहरे रवैये को देख रही है। एक ही प्रकार के मुद्दे पर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया विपक्ष की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।

तमिलनाडु विधानसभा के परिसीमन प्रस्ताव को लेकर अरुण शंकर प्रसाद ने भारत की संघीय व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत एक संघात्मक शासन व्यवस्था वाला देश है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का संतुलन संविधान के तहत निर्धारित है। केंद्र की भूमिका और व्यवस्था को बनाए रखते हुए राज्यों की स्वायत्तता का भी सम्मान किया जाना चाहिए। यदि किसी स्तर पर राज्यों की संवैधानिक स्वायत्तता को कम करने का प्रयास होता है तो इसे संविधान की भावना के विपरीत माना जाएगा। संघीय ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसलिए परिसीमन जैसे संवेदनशील विषयों पर सभी पक्षों के हितों और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखकर चर्चा होनी चाहिए।

एफसीआरए बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने के मुद्दे पर भी मंत्री ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए ऐसे कानूनों की आवश्यकता है, जो विदेशी धन के प्रवाह और उसके इस्तेमाल से जुड़े मामलों में स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें। विपक्ष पर आरोप लगाते हुए अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जो देश की प्रगति के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं। भाजपा की सोच में राष्ट्र सर्वोपरि है और पार्टी 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत को ध्यान में रखकर काम करती है। देश की आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं की जा सकती। एफसीआरए से संबंधित कानूनों को मजबूत करना देशहित और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है।

--आईएएनएस

पीएसके