बिहार विधानसभा में शिक्षक रिक्तियों से लेकर भवनहीन स्कूलों के उठे मुद्दे, मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
पटना, 21 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को शिक्षा विभाग से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। सदन में आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में रिक्त पद, सरकारी विद्यालयों में ड्रेस कोड और भवनहीन स्कूलों का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
बहस के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया एक माह के भीतर पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य की नियमित मॉनिटरिंग शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे और तय समय सीमा में इसे पूरा कराया जाएगा।
पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक ने प्रश्न के माध्यम से सदन का ध्यान आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग 62 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि विद्यालयों में 3,456 पद स्वीकृत हैं, जबकि केवल 1,305 शिक्षक कार्यरत हैं और 2,151 पद खाली पड़े हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई विद्यालयों में संगीत शिक्षकों की भी नियुक्ति नहीं है। इस पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखींद्र राम ने जवाब देते हुए कहा कि विभागीय अभिलेखों के अनुसार कुल 2,406 स्वीकृत पदों में 1,290 शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 20 संगीत शिक्षक भी कार्यरत हैं तथा शेष रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए अधिसूचना बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को भेजी जा चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
हालांकि मंत्री के जवाब से श्याम रजक संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रही है और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। सदन में बहस आगे बढ़ने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं खड़े हुए और कहा कि सदस्य द्वारा उठाई गई चिंता पूरी तरह उचित है। उन्होंने शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि एक माह के भीतर बहाली प्रक्रिया पूरी करने के लिए विशेष मॉनिटरिंग की जाए और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए।
इसी दौरान सदन में सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के ड्रेस कोड का मुद्दा भी उठा। सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए औपचारिक (फॉर्मल) ड्रेस कोड पहले से लागू है। इसे प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए 20 जुलाई को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
भवनहीन विद्यालयों से जुड़े एक अन्य प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि कोई भी विद्यालय बिना भवन के संचालित न हो। उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों के पास भवन, पर्याप्त कमरे या जमीन उपलब्ध नहीं है, उनकी सूची एक सप्ताह के भीतर तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि ऐसे विद्यालयों के लिए आधारभूत संरचना विकसित की जा सके।
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