बिहार: सरकारी सहायता से पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट, निशांत ने दिए 15 लाख, तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी
पटना, 7 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार में सरकारी आर्थिक सहायता से पहली बार लिवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल पर राज्य सरकार ने इस जीवनरक्षक उपचार के लिए 15 लाख रुपए का अनुदान उपलब्ध कराया।
पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में हुए इस सफल प्रत्यारोपण को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। खास बात यह है कि एक 16 वर्षीय ब्रेन डेड किशोर के अंगदान से तीन मरीजों को नया जीवन मिला है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देश पर आईजीआईएमएस में लिवर प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई। मंत्री ने संस्थान के निदेशक और लिवर प्रत्यारोपण विभाग के विभागाध्यक्ष को प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में होने वाले खर्चों की व्यवस्था करने तथा पूर्व घोषित निर्णय के अनुरूप राज्य सरकार की ओर से प्रति मरीज 15 लाख रुपए का अनुदान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
इस उपलब्धि के पीछे पटना के 16 वर्षीय मोनू कुमार का अंगदान है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद आईजीआईएमएस में उपचार के दौरान उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया था। इस कठिन परिस्थिति में उनके परिजनों ने साहसिक निर्णय लेते हुए उनका लिवर और दोनों किडनी दान करने की सहमति दी। उनके इस मानवीय फैसले से तीन जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिला।
मोनू कुमार का लिवर आईजीआईएमएस में भर्ती 19 वर्षीय युवती को प्रत्यारोपित किया गया। वहीं, उनकी दोनों किडनी भी जरूरतमंद मरीजों को दान की गईं। इनमें एक किडनी का प्रत्यारोपण आईजीआईएमएस और दूसरी का एम्स, पटना में सफलतापूर्वक किया गया। इस उपलब्धि के बाद आईजीआईएमएस की चिकित्सकीय टीम ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात की।
मंत्री ने पूरी टीम को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। इस दौरान बिहार के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी लिवर प्रत्यारोपण जैसी जटिल चिकित्सा सुविधाएं शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसमें आवश्यक संसाधनों, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और संस्थागत क्षमता विकसित करने पर विचार किया गया।
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने भी चिकित्सकीय टीम के प्रयासों की सराहना की। प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में आईजीआईएमएस की ब्रेन डेथ कमेटी, एसओटीटीओ बिहार, एनओटीटीओ दिल्ली, आरओटीटीओ कोलकाता तथा आईजीआईएमएस और एम्स, पटना की टीमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी जरूरतमंद मरीज को जीवनरक्षक उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने मोनू कुमार के परिजनों के फैसले को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि अंगदान महादान है। सरकार का लक्ष्य राज्य में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना और अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है।
--आईएएनएस
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