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बिहार: निर्दलीय एमएलसी के भाजपा को समर्थन से एनडीए में बढ़ी हलचल, चिराग पासवान ने भी नैतिकता पर उठाए सवाल

पटना, 3 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव परिणाम के बाद एनडीए में निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा को समर्थन देने के मुद्दे पर खींचतान शुरू हो गई है। दो निर्दलीय उम्मीदवारों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा और फिर सदस्यता जाने के खतरे के मद्देनजर इसे समर्थन बताने के घटनाक्रम ने जदयू की नाराजगी बढ़ा दी है।
 

पटना, 3 नवंबर (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव परिणाम के बाद एनडीए में निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा को समर्थन देने के मुद्दे पर खींचतान शुरू हो गई है। दो निर्दलीय उम्मीदवारों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा और फिर सदस्यता जाने के खतरे के मद्देनजर इसे समर्थन बताने के घटनाक्रम ने जदयू की नाराजगी बढ़ा दी है।

इस बीच बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने स्पष्ट किया है कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया है। मामले को लेकर जदयू उम्मीदवार के सोमवार को प्रस्तावित संवाददाता सम्मेलन को भी स्थगित करना पड़ा।

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के प्रत्याशी और पार्टी प्रवक्ता अभिषेक झा ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा का फोन आने के बाद उन्होंने संवाददाता सम्मेलन स्थगित करने का फैसला लिया है। अभिषेक झा मीडिया को संबोधित करने वाले थे। अब पांच नवंबर को जदयू की समीक्षा बैठक में अपनी बात रखने के बाद मीडिया से बातचीत करेंगे। विवाद की मुख्य वजह निर्दलीय विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज का भाजपा को समर्थन देना है।

चुनाव जीतने के बाद दोनों ने भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी। हालांकि, विधान परिषद की सदस्यता पर संभावित खतरे को देखते हुए बाद में इसे भाजपा को समर्थन देने का मामला बताया गया। विपक्षी दल इसे संविधान और दल-बदल कानून का उल्लंघन बता रहे हैं।

इस मुद्दे पर एनडीए के घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी नैतिकता का सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि इसमें गठबंधन धर्म का विषय कहां से आता है। यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि वह किस दल का समर्थन करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कानून के कारण किसी दल में शामिल होना संभव नहीं है तो नैतिकता भी एक बड़ा आधार है।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी सवाल उठाए। उन्होंने खास तौर पर राहुल राज की भाजपा में वापसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस नेता को पार्टी ने छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था, उसे चुनाव जीतते ही इतनी हड़बड़ी में वापस लेने का क्या औचित्य है? विवाद बढ़ने के बीच संजय सरावगी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दिया है।

उन्होंने कहा कि दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नीतियों में आस्था जताई है। सरावगी के इस बयान को भाजपा की ओर से मामले में स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जदयू के बीच सीटों को लेकर बनी सहमति के बावजूद परिणामों के बाद दोनों दलों के बीच असहजता सामने आई है।

निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन और संभावित दल-बदल के मुद्दे ने गठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। जदयू की नाराजगी और विपक्ष के आरोपों के बीच अब पांच नवंबर को होने वाली पार्टी की समीक्षा बैठक पर नजरें टिकी हैं। इस बैठक में चुनाव परिणामों और निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा को समर्थन देने के मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी