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बिहार में मानसून की विदाई करीब, फिर भी बारिश की कमी, एक ओर बाढ़ तो दूसरी तरफ सूखे की मार

पटना, 15 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन इस साल राज्य में बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। मौसम विभाग की मानक गणना के अनुसार मानसून की अवधि एक जून से 30 सितंबर तक रहती है और अब इसके समाप्त होने में महज एक पखवाड़ा शेष है। इसके बावजूद राज्य में अब तक सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि औरंगाबाद को छोड़कर राज्य के सभी 37 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।
 

पटना, 15 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन इस साल राज्य में बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। मौसम विभाग की मानक गणना के अनुसार मानसून की अवधि एक जून से 30 सितंबर तक रहती है और अब इसके समाप्त होने में महज एक पखवाड़ा शेष है। इसके बावजूद राज्य में अब तक सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि औरंगाबाद को छोड़कर राज्य के सभी 37 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक, एक जून से 14 सितंबर तक बिहार में कई जिले ऐसे है जहां सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे अधिक बारिश की कमी शिवहर जिले में रही, जहां सामान्य से 62 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वहीं सीतामढ़ी और जहानाबाद में बारिश की कमी 58 प्रतिशत दर्ज की गई है। दिलचस्प और चिंताजनक स्थिति यह है कि राज्य में बारिश की कमी के बावजूद इस मानसून में कई प्रमुख नदियों ने रौद्र रूप दिखाया। गंगा, कोसी, गंडक सहित सात बड़ी नदियों और पुनपुन समेत छह से अधिक छोटी नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी रही।

गंगा नदी ने पटना और भागलपुर में जलस्तर के अब तक के कई पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुंच गया था, जो वर्ष 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर से छह सेंटीमीटर अधिक था। इसी तरह भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर तक पहुंच गया, जिसने वर्ष 2021 में दर्ज 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर को पार कर दिया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 13 सितंबर तक विभिन्न नदियों के बढ़े जलस्तर और बाढ़ के कारण राज्य के 15 जिलों में व्यापक असर पड़ा है। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों के करीब 48.70 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में खेतों में लगी फसलें पानी में डूब गईं। कई इलाकों में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।

वहीं, दूसरी तरफ राज्य के ऐसे बड़े हिस्से भी हैं, जहां पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कृषि कार्य प्रभावित हुआ है और फसलों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है। इस तरह बिहार में इस वर्ष मानसून की सबसे बड़ी विडंबना सामने आई है। एक ही जिले में नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का पानी फसलों को डुबो रहा है जबकि उसी जिले के दूसरे हिस्सों में बारिश के अभाव में खेतों में नमी की कमी बनी हुई है।

इससे किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। मानसून की विदाई में अब केवल करीब 15 दिन शेष हैं। ऐसे में राज्य में आने वाले दिनों में होने वाली बारिश कृषि और जल संसाधन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी घटने और जनजीवन सामान्य होने का इंतजार है, तो दूसरी ओर कम बारिश वाले जिलों में किसान मानसून की बची अवधि में अच्छी वर्षा की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

--आईएएनएस

एमएनपी/पीएम