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बिहार में इस मौसम का बाढ़ अंतिम चरण में, गाद प्रबंधन और हाई-लेवल डैम ही बाढ़ का स्थायी समाधान : विजय चौधरी

पटना, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और प्रदेश बाढ़ के मौसम के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हालांकि कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है और तटबंधों पर दबाव बना हुआ है, लेकिन स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि नेपाल में बारिश होने पर स्थिति बदल सकती है, इसलिए विभाग पूरी तरह सतर्क है।
 

पटना, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और प्रदेश बाढ़ के मौसम के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हालांकि कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है और तटबंधों पर दबाव बना हुआ है, लेकिन स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि नेपाल में बारिश होने पर स्थिति बदल सकती है, इसलिए विभाग पूरी तरह सतर्क है।

प्रेस वार्ता में चौधरी ने कहा कि इस वर्ष गंगा में अप्रत्याशित जलस्राव के कारण भागलपुर सहित कई इलाकों में गंभीर स्थिति बनी। विभागीय अधिकारियों ने दिन-रात मेहनत कर तटबंधों को बचाया। इसके बाद नेपाल में हुई अप्रत्याशित बारिश से गंडक नदी का जलस्राव ऑल टाइम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। गंगा में भी पटना के गांधी घाट से लेकर भागलपुर तक कई स्थानों पर नया उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि गंडक में 10-12 दिनों तक लगातार दबाव बना रहा।

पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और वैशाली में भी इसका असर रहा। इस दौरान करीब पांच-छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए। चौधरी ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने पर गंडक, कोसी, घाघरा, कमला और महानंदा जैसी नदियों का पानी गंगा में जाने में बाधा आती है और बैकवाटर प्रेशर बढ़ जाता है। लंबे समय तक जलस्तर ऊंचा रहने से ढीली मिट्टी में पाइपिंग की स्थिति बनती है, जिससे तटबंधों पर अचानक दबाव बढ़ सकता है।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि विभागीय समीक्षा में कुछ अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, उन पर कार्रवाई भी हुई है। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है और संवेदनशील परिस्थितियों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मीडिया द्वारा बाढ़ और तटबंधों की स्थिति सामने लाने से मुख्यालय स्तर पर निगरानी में भी मदद मिलती है। चौधरी ने गाद की समस्या को बिहार की नदियों की प्रमुख समस्या बताते हुए कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से केंद्र के समक्ष यह मुद्दा उठाती रही है।

उन्होंने कहा कि 2011 से ही बिहार गाद प्रबंधन की जरूरत पर जोर देता रहा है। 2012-13 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ बैठक में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह मुद्दा उठाया गया था। अब इस दिशा में एक फ्रेमवर्क तैयार हुआ है और राज्यों से राय ली जा रही है। फरक्का संधि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 1996 में हुए समझौते में बिहार के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। अब संधि के नवीनीकरण की चर्चा के बीच बिहार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संजय झा के साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर के समक्ष अपना पक्ष रखा है।

उन्होंने बिहार के हितों का ध्यान रखने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ लाने वाली कई प्रमुख नदियों का उद्गम नेपाल में है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार हाई-लेवल डैम इसका स्थायी समाधान हो सकता है। भारत और बिहार सरकार ने इस दिशा में पहल की है, लेकिन नेपाल से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विवाद को सुलझाने की दिशा में एक रास्ता मिला है। विजय चौधरी ने कहा कि ललन सिंह ने इस मामले में जो भी बातें कही हैं, पार्टी उनका संज्ञान ले रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विवाद से जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी पार्टी स्तर पर विचार किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एमएनपी/पीएम