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बिहार में 222 स्थानों पर छापेमारी, 122 बाल श्रमिक मुक्त, 60 मामलों में प्राथमिकी दर्ज

पटना, 31 मई (आईएएनएस)। बिहार को बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर विशेष विमुक्ति एवं जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत पिछले 10 दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों में सघन निरीक्षण एवं छापेमारी की गई। बताया गया कि 20 मई से 30 मई के बीच प्रदेश के विभिन्न इलाकों में कुल 222 स्थानों पर जांच अभियान चलाया गया, जिसमें 122 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया तथा बाल श्रम कराने वाले 60 नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई।
 
बिहार में 222 स्थानों पर छापेमारी, 122 बाल श्रमिक मुक्त, 60 मामलों में प्राथमिकी दर्ज

पटना, 31 मई (आईएएनएस)। बिहार को बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर विशेष विमुक्ति एवं जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत पिछले 10 दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों में सघन निरीक्षण एवं छापेमारी की गई। बताया गया कि 20 मई से 30 मई के बीच प्रदेश के विभिन्न इलाकों में कुल 222 स्थानों पर जांच अभियान चलाया गया, जिसमें 122 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराया गया तथा बाल श्रम कराने वाले 60 नियोजकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई।

श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के अनुसार, बाल श्रम को समाप्त करने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है। इसके अंतर्गत न केवल बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें कार्यस्थलों से मुक्त कराया जा रहा है, बल्कि उनके पुनर्वास, शिक्षा से जोड़ने तथा उनके परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में भी समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य के सभी जिलों में जिला प्रशासन, श्रम विभाग, पुलिस प्रशासन, बाल संरक्षण इकाइयों तथा संबंधित विभागों के सहयोग से विशेष धावा दलों का गठन किया गया है। इन दलों द्वारा होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, चाय की दुकान, गैराज, कार्यशालाएं, ईंट-भट्ठे, घरेलू प्रतिष्ठान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान एवं अन्य संभावित कार्यस्थलों पर नियमित जांच अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान के दौरान बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें तत्काल विमुक्त कराया गया तथा उनके संबंध में आवश्यक कानूनी और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई प्रारंभ की गई।

विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने बताया कि बाल श्रम न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकारों का भी हनन करता है। बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करता है तथा उन्हें शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसरों से वंचित कर देता है, इसलिए बिहार सरकार बाल श्रम उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्रवाई कर रही है।

उन्होंने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है जहां मुक्त कराए गए किशोर श्रमिकों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से 25,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। सहायता का उद्देश्य विमुक्त बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास और सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना है। विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए भी कार्य कर रहा है कि मुक्त बच्चों का विद्यालयों में नामांकन हो तथा वे पुनः श्रम के चक्र में न फंसें।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी