बिहार के पश्चिम चंपारण में बाढ़ का कहर, 3 किमी तक कमर भर पानी में चलने को मजबूर ग्रामीण
चंपारण, 31 अगस्त (आईएएनएस)। नेपाल में सैलाब के बाद इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से रविवार को 1 लाख 80 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी उफान पर है। नदी के जलस्तर बढ़ते ही निचले और दियारा इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
सबसे पहले चकदहवा झंडू टोला, बीन टोली और कान्हा टोला में बाढ़ का पानी प्रवेश करता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, लगभग तीन महीने तक उन्हें कमर भर पानी में आने-जाने को मजबूर होना पड़ता है। बाढ़ के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। सड़कें टूटी हुई हैं, बिजली की सुविधा नहीं है और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, वहीं बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी हो रही है।
एक स्थानीय निवासी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "बहुत बुरा हाल है। लोगों को आने-जाने के लिए 3 किलोमीटर तक पानी में से होकर गुजरना पड़ता है। कोई सड़क नहीं है। हमारा हाल बहुत बुरा है। न तो सरकार और न ही प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है। सब बस आते हैं, देखते हैं और चले जाते हैं।"
एक अन्य ग्रामीण ने बताया, "जब भी बरसात आती है, ऐसे ही हो जाता है। ना बिजली की सुविधा है, ना रास्ता अच्छा है। बहुत परेशानी है। कमर से ऊपर तक पानी है। हर कोई आता है, तो देखकर चला जाता है। यहां की स्थिति में कोई सुधार नहीं है। हम लोगों को बहुत समस्या हो रही है।"
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि बाढ के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। सड़क, बिजली और बाढ़ से बचाव के लिए स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि हर साल उन्हें इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
--आईएएनएस
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