बिहार: जीविका दीदियों को मिला तिरंगा बनाने का काम, 68 हजार झंडे तैयार करने का लक्ष्य
सीतामढ़ी, 12 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार की जीविका दीदियां अब केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और देश के सबसे बड़े पर्व स्वतंत्रता दिवस में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। सीतामढ़ी जिले में इस बार हर घर तिरंगा अभियान के तहत जीविका दीदियों को 68 हजार से अधिक राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है। इस काम ने जहां महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया है। वहीं, उनके भीतर देश सेवा और राष्ट्रीयता की भावना को भी मजबूत किया है।
सीतामढ़ी में जीविका दीदियों के बीच तिरंगा बनाने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। जिले के सभी 17 प्रखंडों में 4-4 हजार तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था से जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहीं महिलाओं को रोजगार का समान अवसर मिल रहा है। जीविका दीदियां कपड़े की खरीदारी से लेकर तिरंगे की सिलाई और उसे तैयार करने तक का काम कर रही हैं।
सीतामढ़ी जीविका के डीपीएम उमाशंकर भगत ने बताया कि जिले में कुल 17 प्रखंड हैं और हर प्रखंड को 4 हजार तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। इस तरह जिले के लिए कुल करीब 68 हजार तिरंगे तैयार किए जाने हैं। उन्होंने बताया कि तिरंगे का आकार 12 इंच चौड़ा और 18 इंच लंबा रखा गया है तथा उसके बीच में अशोक चक्र बनाया जा रहा है। सभी प्रखंडों के बीपीएम के माध्यम से जीविका दीदियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रखंड में तीन से चार क्लस्टर लेवल फेडरेशन यानी संकुल संघ हैं। वहां की जीविका दीदियों ने बाजार से तीन कोटेशन लेकर कपड़े की खरीदारी की और इसके बाद तिरंगे की सिलाई शुरू की।
उमाशंकर भगत ने आगे बताया कि 13 अगस्त तक सीतामढ़ी में 40 हजार से अधिक झंडे तैयार किए जा चुके थे। जीविका की कोशिश है कि जल्द से जल्द 68 हजार के लक्ष्य को पूरा कर लिया जाए। प्रत्येक झंडे की लागत 25 रुपए निर्धारित की गई है, जिसमें कपड़े और झंडे के निर्माण से जुड़े खर्च शामिल हैं। सीतामढ़ी में करीब 48 हजार स्वयं सहायता समूहों से लगभग 6 लाख दीदियां जुड़ी हुई हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाने में ये महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगी।
जीविका दीदी मोनी झा ने बताया कि इससे पहले उनके यहां आईसीडीएस कार्यालय के लिए ड्रेस तैयार करने का काम किया जाता था। इसके बाद जीविका दीदियों को तिरंगा तैयार करने का काम मिला। पूरे सीतामढ़ी जिले के लिए 68 हजार से अधिक तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य है। इस काम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। उन्हें अपने ही क्षेत्र और अपनी मातृभूमि में रहकर काम करने का अवसर मिल रहा है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। सरकार का आभार जताते हुए मोनी झा ने कहा कि महिलाओं को काम करने और आगे बढ़ने का अवसर मिलना उनके लिए बड़ी बात है।
जीविका दीदी इशरत अफसाना ने बताया कि वह वर्ष 2017 से जीविका से जुड़ी हुई हैं। जीविका से जुड़ने से पहले उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं था। बाद में जीविका के माध्यम से उन्हें काम मिलने लगा। उन्होंने बताया कि पहले आंगनबाड़ी के लिए ड्रेस सिलने का काम मिला और अब स्वतंत्रता दिवस के लिए तिरंगा तैयार करने का अवसर मिला है। पहले महिलाएं घर पर रहती थीं और उनकी आय का कोई साधन नहीं था, लेकिन जीविका के माध्यम से उन्हें रोजगार मिलने लगा है। वह चाहती हैं कि आगे भी इसी तरह महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलते रहें और जीविका से जुड़ी महिलाएं लगातार तरक्की करें। सरकार का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।
--आईएएनएस
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