बिहार: हस्तशिल्प से लेकर देशी व्यंजनों तक, पटना सरस मेले में हर उम्र के लोगों का आकर्षण
पटना, 22 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित बिहार सरस मेला के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। मेले में हर उम्र और वर्ग के लोग परिवार के साथ पहुंच रहे हैं और ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प, खाद्य एवं अन्य उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं। साथ ही लोग विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का भी आनंद ले रहे हैं।
ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा आयोजित यह मेला 29 सितंबर तक चलेगा। आयोजन के दूसरे दिन सोमवार को 24 हजार से अधिक लोगों ने मेले का भ्रमण किया। इस दौरान उत्पादों और व्यंजनों की 22 लाख 90 हजार रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री हुई। पहले दिन करीब 20 लाख 28 हजार रुपए की बिक्री हुई थी। मेले में 15 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमी अपने उत्पाद लेकर पहुंची हैं।
मधुबनी पेंटिंग, सुजनी, सिक्की शिल्प, टेराकोटा, भागलपुरी सिल्क, मखाना, गोविंद भोग चावल, कतरनी चूड़ा-चावल, गुड़, रवा, मड़ुआ, बाजरा, मिलेट्स, अचार-पापड़ और हर्बल उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। फूड कोर्ट में लिट्टी-चोखा, सेव-बुनिया, चाट और गोलगप्पे सहित विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ रही है। मेले में कृत्रिम फूल, कृत्रिम आभूषण, कालीन, रग्स, सजावटी सामान, खादी और ऊनी परिधान, आयुर्वेदिक पौधे तथा फूल एवं फलों के पौधे भी लोगों की पसंद बने हुए हैं।
सरस मेले की खास पहल प्रतिदिन आयोजित होने वाला क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम है। जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण उत्पादकों को बड़े खरीदारों और वितरकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इसका उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुधार के साथ ग्रामीण उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है। मंगलवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में ब्रीहति, नेचुरल बी फार्म, हनी हॉस्पिटैलिटी सहित कई बड़े खरीदार और वितरक शामिल हुए। उन्होंने जीविका दीदियों के उत्पादों की गुणवत्ता देखी और उद्यमियों से सीधा संवाद किया।
कार्यक्रम में जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक माधवी चौधरी और परियोजना प्रबंधक आलोक कुमार गोपाल ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने गुणवत्ता, मानकीकरण, आकर्षक ब्रांडिंग और आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के संबंध में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि बेहतर पैकेजिंग, समान गुणवत्ता और उत्पाद के साथ जुड़ी ब्रांड कहानी ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाजारों और ई-कॉमर्स मंचों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
मेले में शामिल जीविका दीदियों ने बताया कि सरस मेला उन्हें गांव से बाहर अपने उत्पादों की पहचान बनाने और बड़े खरीदारों से संपर्क का अवसर दे रहा है। मेले के सभी स्टॉल पर डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। रुपए की जमा-निकासी के लिए ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। बिहार सरस मेला 29 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा।
--आईएएनएस
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