बिहार : दिल्ली से आकर भोजपुर में साइबर ठगी, गिरोह के नौ सदस्य गिरफ्तार
आरा, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार के भोजपुर जिले की साइबर पुलिस ने क्रेडिट कार्ड प्रोटेक्शन प्लान (सीपीपी) और इंश्योरेंस ऑफर के नाम पर लोगों से साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है।
पुलिस ने सिकरहटा थाना क्षेत्र के चकिया गांव स्थित एक मकान में छापेमारी कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का नेटवर्क दिल्ली से संचालित हो रहा था। आरोपितों के पास से 27 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 34 सिम कार्ड, 11 डेबिट कार्ड और 22 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। रविवार को साइबर डीएसपी सह साइबर थानाध्यक्ष रौशन कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि सिकरहटा थानाध्यक्ष को चकिया गांव में कुछ लोगों द्वारा मोबाइल और लैपटॉप के जरिए संदिग्ध गतिविधियां संचालित किए जाने की सूचना मिली थी।
पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो बड़ी संख्या में मोबाइल, सिम कार्ड और अन्य उपकरण मिले। पूछताछ में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर लैपटॉप और सिस्टम की जांच की गई। इनमें इंटरनेट कॉलिंग के लिए एक्स-लाइट और एपीके फाइल तैयार करने और उनमें बदलाव के लिए एपीके स्टूडियो जैसे सॉफ्टवेयर मिले।
डीएसपी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों में बिहार के विभिन्न जिलों के निवासी और पश्चिम बंगाल का एक व्यक्ति शामिल हैं। इनका एक अन्य साथी दिल्ली में है। गिरोह के सदस्य दिल्ली के प्रेमनगर क्षेत्र में रहकर जून 2026 से इस गतिविधि में संलिप्त थे। करीब 10-15 दिन पहले वे चकिया गांव पहुंचे थे और दो अलग-अलग कमरों से अपना नेटवर्क चला रहे थे।
जांच में सामने आया कि गिरोह जस्टडायल के माध्यम से ग्राहकों का डेटा जुटाता था। इसके बाद इंटरनेट कॉलिंग के जरिए लोगों को क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस प्लान देने का झांसा दिया जाता था और इसके लिए करीब 2,499 से 2,500 रुपए भुगतान करने को कहा जाता था।
आरोपित ओटीपी हासिल कर भुगतान करवा लेते थे। ठगी की रकम पेटीएम जैसे डिजिटल वॉलेट में ली जाती थी और शिकायत सामने आने पर वॉलेट बदल दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, एक्स-लाइट जैसे सॉफ्टवेयर के जरिए इंटरनेट कॉलिंग की जाती थी, जिससे कॉल करने वाले की पहचान करना और वापस उसी नंबर पर संपर्क करना मुश्किल हो जाता था।
गिरोह के सदस्य ठगी की रकम एटीएम के पास कैश डिपॉजिट, वॉलेट और ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से आपस में बांटते थे। सिम की कमी होने पर गिरोह का एक सदस्य तकनीकी सहायता देता था, जिसने एथिकल हैकिंग का प्रशिक्षण लिया था।
पुलिस को आरोपितों के पास से 25 से अधिक लोगों के नाम वाली एक सूची भी मिली है। ग्राहकों का डेटा व्हाट्सएप के जरिए 24 घंटे के टाइमर वाले संदेशों में साझा किया जाता था, ताकि संदेश स्वतः डिलीट हो जाएं। पुलिस ने बीएनएस, आईटी एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और कुल कितनी रकम की ठगी की, इसकी जांच की जा रही है।
--आईएएनएस
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