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बिहार : बांध टूटने के बाद बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे पप्पू यादव, बोले-यह प्राकृतिक नहीं, पॉलिटिकल डिजास्टर है

बेतिया, 29 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के पश्चिम चंपारण के बगहा विधानसभा क्षेत्र के खेरटवा गांव में बांध टूटने के बाद कई गांवों में पानी फैल गया है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मंगलवार को बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें सहयोग किया।
 

बेतिया, 29 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार के पश्चिम चंपारण के बगहा विधानसभा क्षेत्र के खेरटवा गांव में बांध टूटने के बाद कई गांवों में पानी फैल गया है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव मंगलवार को बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें सहयोग किया।

मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने बांध की गुणवत्ता और बाढ़ से निपटने की सरकारी तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये के बिल बनते हैं, लेकिन बांध बार-बार टूट रहा है। उन्होंने कहा कि यह बांध 2024 में भी टूटा था और अब 2026 में फिर टूट गया है। बांध पर ठोकर नहीं होने के कारण नदी के पानी का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांध निर्माण और मरम्मत से जुड़े ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि बांध निर्माण और मरम्मत से जुड़े ठेकेदारों तथा जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या केवल राहत सामग्री बांटने से हल नहीं होगी। नदियों में जमा गाद हटाने, ठोकर और गार्ड बांध बनाने तथा बैराजों की मजबूती पर गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की बाढ़ की समस्या को केवल प्राकृतिक आपदा बताकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने इसे 'पॉलिटिकल डिजास्टर' करार देते हुए कहा कि दशकों से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कई प्रभावशाली जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन इसके बावजूद जनता हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि सालभर काम होने के बावजूद बांध मजबूत क्यों नहीं हो पाता? पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में घरों में छाती तक पानी पहुंच गया है और गंडक नदी महज 300-400 मीटर की दूरी पर है। यदि ऊपर से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, तो बगहा और वाल्मीकि नगर के बड़े हिस्से के लिए गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने दावा किया कि नौतन, बेतिया और करीब 12 किलोमीटर लंबे रजभटिया से रतवल तक के बांध के कई हिस्सों में बोल्डर नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ से किसानों की हजारों एकड़ जमीन और गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। 2024 के बाद 2026 में दोबारा बांध टूटना सरकारी दावों पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि सरकार हर बार बांधों को सुरक्षित बताती है, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है।

पप्पू यादव ने व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बाढ़ पीड़ितों को दूध, नाव, मवेशियों के लिए भूसा, पन्नी और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि गोपालगंज, बगहा, वाल्मीकि नगर, बेतिया, मोतिहारी के कुछ हिस्सों के साथ मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और मिथिला क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है।

--आईएएनएस

एमएनपी/एसके