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बिहार बाढ़ पीड़ितों के लिए एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक महीने की सैलरी देना सराहनीय : राजीव रंजन

पटना, 20 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक महीने की सैलरी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने के फैसले का स्वागत करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि यह एक मिसाल कायम करने वाला कदम है।
 

पटना, 20 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक महीने की सैलरी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने के फैसले का स्वागत करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि यह एक मिसाल कायम करने वाला कदम है।

उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "इतनी भयानक बाढ़ के बीच, लोगों की मुश्किलों को कम करने और स्थिति को जितना हो सके काबू में करने की कोशिशें की जा रही हैं। राहत और पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे हालात में केंद्र की मदद, राज्य सरकार के संसाधन और फिर आम लोगों की भागीदारी होती है। अब जन-प्रतिनिधियों ने इस बड़े अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का फैसला किया है, और यह एक स्वागत योग्य कदम है।"

वहीं, जेडीयू विधायक अनंत सिंह और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार के बीच चल रहे मतभेदों पर पूछे गए सवाल पर राजीव रंजन ने इसे चुनाव से पहले की सामान्य खींचतान बताया। उन्होंने कहा, "अभी चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। लेकिन एनडीए एक बड़ा परिवार है और इसके सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं। बिहार में हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की है। इसलिए, अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। हमें अब भी भरोसा है कि सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा।"

इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान मंच से एक बुजुर्ग माता को कुर्सी देने के लिए कहने वाले बयान का कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के मंच से मजाक उड़ाए जाने की घटना पर भी कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा।

राजीव रंजन ने कहा, "राहुल गांधी 'सेल्फ-गोल' करने की कला में माहिर हो गए हैं। वे अक्सर ऐसी गलतियां करते हैं जो भारतीय जनता को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होतीं। एक मां के प्रति आम लोगों के सम्मान और श्रद्धा को समझे बिना ऐसी बातें कहना गलत है। बेशक, राहुल गांधी ने 'गूंज' कार्यक्रम में कई बातें कही होंगी, लेकिन आज सिर्फ इसी बात पर चर्चा हो रही है। इसलिए, यह समझा जाना चाहिए कि अब तक उन्होंने जितने भी 'गूंज' कार्यक्रम किए हैं, वे बेमतलब साबित हुए हैं।"

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस