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बिहार: आंगनबाड़ी केंद्रों की तर्ज पर अब स्कूली बच्चों को दिए जाएंगे जीविका दीदियों के माध्यम से तैयार पोशाक

पटना, 18 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार में अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की तर्ज पर ही स्कूली बच्चों को जीविका दीदियों के माध्यम से तैयार किए हुए पोशाक दिए जाएंगे। बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने रविवार को कहा कि प्राथमिक स्कूल के कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को भी जीविका दीदियों द्वारा तैयार पोशाक देने की पहल की जाएगी।
 
बिहार: आंगनबाड़ी केंद्रों की तर्ज पर अब स्कूली बच्चों को दिए जाएंगे जीविका दीदियों के माध्यम से तैयार पोशाक

पटना, 18 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार में अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की तर्ज पर ही स्कूली बच्चों को जीविका दीदियों के माध्यम से तैयार किए हुए पोशाक दिए जाएंगे। बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने रविवार को कहा कि प्राथमिक स्कूल के कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को भी जीविका दीदियों द्वारा तैयार पोशाक देने की पहल की जाएगी।

पटना के दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी के साथ संयुक्त रूप से श्रवण कुमार आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को जीविका दीदियों द्वारा निर्मित पोशाक (ड्रेस) का वितरण कर रहे थे। उन्होंने शिक्षा विभाग के साथ इस मामले को लेकर पहल करने के लिए अपने विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार को कहा, ताकि दोनों विभागों के बीच जल्द एक उच्च स्तरीय बैठक हो सके और इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सके।

दोनों मंत्रियों ने विभागीय अधिकारियों के साथ अलग-अलग केंद्रों पर जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को एक जोड़ी पोशाक का वितरण किया। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि हाल में स्वरोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत जीविका समूह की 1 करोड़ 54 लाख दीदियों को 10-10 हजार रुपए की राशि दी गई थी। इनमें से जिन दीदियों ने सिलाई मशीन खरीदने के नाम पर राशि ली है, उन्हें भी समूह बनाकर पोशाक निर्माण के कार्य से जोड़ा जाएगा। अभी पोशाक तैयार करने के काम में करीब एक लाख महिलाएं 1050 केंद्रों के माध्यम से जुड़ी हुई हैं। आने वाले समय में पांच लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आज 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से 1 करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। मंत्री मदन सहनी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को सप्ताह में दो दिन अंडा और रोजाना दूध दिया जाता है। उन्हें पोशाक मिलने से सभी बच्चों में एकरूपता आएगी। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की सहायिका और सेविका से कहा कि उनका मानदेय बढ़ाया गया है। अब उन्हें बच्चों पर अच्छे से ध्यान देना चाहिए। बच्चों को केंद्र पर सप्ताह में रोजाना अलग-अलग मेनू के तहत भोजन देना है। इससे बच्चों को कुपोषण में सुधार होगा।

समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयसी ने कहा कि कम समय में जीविका दीदियों ने 50 लाख बच्चों का पोशाक तैयार कर दिया, यह बेहद खास बात है। इस वर्ष मार्च तक सभी केंद्रों के बच्चों को पोशाक मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वर्ष के लिए तैयारी शुरू हो जाएगी। एक बच्चे को साल में दो पोशाक देने की योजना है।

--आईएएनएस

एमएनपी/डीकेपी