भारतीय नौसेना को मिला दूसरा स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल 'निपुण', गहरे समुद्र में बचाव अभियानों को मिलेगी नई ताकत
नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना को गुरुवार को अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) द्वारा निर्मित दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) 'निपुण' विशाखापट्टनम में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।
'निपुण' का डिजाइन और निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) के वर्गीकरण मानकों के अनुरूप किया गया है। संस्कृत शब्द 'निपुण' का अर्थ किसी विशेष क्षेत्र में दक्ष, सक्षम और पारंगत व्यक्ति होता है। अपने नाम के अनुरूप यह पोत गहरे समुद्र में डाइविंग और समुद्री बचाव अभियानों के लिए अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है।
इस पोत में अत्याधुनिक डाइविंग उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से यह डीप सी सैचुरेशन डाइविंग जैसी जटिल और लंबी अवधि की समुद्री डाइविंग कर सकता है। इसके अलावा, इसमें साइड डाइविंग स्टेज की सुविधा भी दी गई है, जिससे समुद्र में विभिन्न प्रकार के डाइविंग ऑपरेशन आसानी से किए जा सकेंगे।
'निपुण' में लगाए गए रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) इसकी परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाते हैं। इनकी सहायता से गोताखोरों की निगरानी के साथ-साथ गहरे समुद्र में खोज एवं बचाव तथा सल्वेज (मलबा निकालने) जैसे अभियानों को भी प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकेगा।
यह पोत डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (डीएसआरवी) के लिए 'मदर शिप' के रूप में भी कार्य करेगा। किसी पनडुब्बी में आपात स्थिति उत्पन्न होने पर डीएसआरवी के माध्यम से उसमें फंसे कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकालने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री से निर्मित 'निपुण' की डिलीवरी 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की गहरे समुद्र में डाइविंग, खोज एवं बचाव अभियानों की क्षमता को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी।
--आईएएनएस
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