भारतीय नौसेना को मिला स्वदेशी बहुउद्देशीय परीक्षण पोत आईएनएस 'समर्थक', उपराष्ट्रपति बोले-रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बन रही हकीकत
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कर्नाटक के कारवार में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक का शुभारंभ किया। यह शुभारंभ रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और उन्नत स्वदेशी नौसैनिक क्षमताओं के विकास की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से युक्त आईएनएस समर्थक भारत की औद्योगिक, प्रौद्योगिकीय और जहाज निर्माण क्षमताओं की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल एक आकांक्षा नहीं बल्कि एक उभरती हुई वास्तविकता है, जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए विकसित और आत्मनिर्भर भारत के विजन में योगदान देती है।
सीपी राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को रेखांकित करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज और चोल वंश की नौसैनिक परंपराओं को याद किया, जिन्होंने हिंद महासागर और दक्षिण पूर्व एशिया में भारत के समुद्री प्रभाव का विस्तार किया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय संप्रभुता और समुद्री हितों की रक्षा में भारतीय नौसेना की विशिष्ट सेवाओं की सराहना की। उन्होंने समुद्री डकैती विरोधी अभियानों, भारतीय नागरिकों की निकासी और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों सहित हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के रूप में इसकी भूमिका की भी प्रशंसा की।
उपराष्ट्रपति ने आईएनएस समर्थक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पोत अगली पीढ़ी के हथियारों, सेंसरों और उभरती प्रौद्योगिकियों के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए एक बहुमुखी मंच के रूप में कार्य करेगा। इसकी क्षमताएं समुद्री निगरानी और टोही, अपतटीय गश्त, लक्ष्य प्रक्षेपण और पुनर्प्राप्ति, मानवरहित प्रणालियों से जुड़े अभियानों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत में भी सहायक होंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा मंच नौसेना को उभरते प्रौद्योगिकीय विकासों के साथ तेजी से तालमेल बिठाने और स्वदेशी नवाचार को परिचालन क्षमताओं में बदलने में सक्षम बनाएगा।
सीपी राधाकृष्णन ने कारवार के रणनीतिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका गहरा प्राकृतिक बंदरगाह और अरब सागर से निकटता इसे भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना का एक महत्वपूर्ण घटक बनाती है। उन्होंने प्रोजेक्ट सीबर्ड के तहत चल रहे आधुनिक नौसैनिक अवसंरचना के विकास पर प्रकाश डाला, जो क्षेत्र के लिए व्यापक आर्थिक अवसर पैदा करते हुए जहाजों और पनडुब्बियों को तैनात करने और बनाए रखने की नौसेना की क्षमता को बढ़ा रहा है।
उपराष्ट्रपति ने भारत के रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने में भारतीय नौसेना, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी शिपयार्डों, डीआरडीओ, शिक्षाविदों, एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स के बीच बढ़ती साझेदारी को भी रेखांकित किया। उन्होंने परियोजना में लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) के योगदान का उल्लेख करते हुए, स्वदेशी नौसैनिक क्षमताओं के निर्माण में नौसेना डिजाइनरों, उत्पादन अधिकारियों, शिपयार्ड पेशेवरों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, आपूर्तिकर्ताओं और सहायक उद्योगों के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन; फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सयान; युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु; फ्लैग ऑफिसर (कर्नाटक) रियर एडमिरल विक्रम मेनन; एल एंड टी के जहाज निर्माण प्रमुख सेवानिवृत्त रियर एडमिरल जी.के. हरीश, आई.एस. समर्थक के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर सुशील कुमार सिंह, भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
--आईएएनएस
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