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भारतीय मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे, देश की एकता और तरक्की में देंगे योगदानः मोतासिम खान

हैदराबाद, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने मस्जिदों को गिराए जाने, मदरसों को कथित तौर पर परेशान किए जाने और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के सामने आ रही चुनौतियों की आलोचना की है। उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया और इस बात को दोहराया कि भारतीय मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे। साथ ही, देश की एकता और तरक्की में अपना योगदान देंगे।
 

हैदराबाद, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने मस्जिदों को गिराए जाने, मदरसों को कथित तौर पर परेशान किए जाने और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के सामने आ रही चुनौतियों की आलोचना की है। उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया और इस बात को दोहराया कि भारतीय मुसलमान अपने धर्म पर कायम रहेंगे। साथ ही, देश की एकता और तरक्की में अपना योगदान देंगे।

मोतासिम खान ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पूरे भारत में समय-समय पर मस्जिदों को गिराने (या शहीद करने) की घटनाएं सामने आती रहती हैं। एक तरफ मस्जिदों को गिराने का सिलसिला जारी है, तो दूसरी तरफ इस्लामी मदरसों को रुकावटों, तालाबंदी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें आतंकवाद के अड्डों के रूप में पेश करने की कोशिशें की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि इन धार्मिक संस्थानों और मस्जिदों के अलावा, जौहर यूनिवर्सिटी, अल-फलाह यूनिवर्सिटी, असम-मेघालय सीमा पर स्थित एक यूनिवर्सिटी, और अलीगढ़ और जामिया जैसे संस्थानों के अल्पसंख्यक स्वरूप को कमजोर करने की कोशिशें भी लगातार जारी हैं। इसके साथ ही, वक्फ संशोधन अधिनियम और समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लागू करने के प्रयास भी चल रहे हैं।

मोतासिम खान ने कहा कि इन सभी घटनाओं से ऐसा लगता है कि देश भर में कुछ ताकतवर या सांप्रदायिक ताकतें नहीं चाहतीं कि मुसलमान इस्लाम का पालन करें। कुल मिलाकर मुसलमानों के लिए जीवन लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सोच रखने वालों को फिरौन, नमरूद, हिटलर और मुसोलिनी का अंजाम याद रखना चाहिए और उन देशों की हालत देखनी चाहिए जहां जुल्म का बोलबाला है। भारतीय मुसलमान होने के नाते, हम यह संकल्प लेते हैं कि हम किसी भी परिस्थिति में न तो यह देश छोड़ेंगे और न ही इस्लाम। हमारा पक्का इरादा है कि हम भारत को दया और प्रेम का देश बनाने में अपना योगदान दें। जो लोग नफरत के सौदागर बन गए हैं और इसे फैलाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं, वे न तो समाज की सेवा कर रहे हैं और न ही देश की। उनका यह जुल्म कभी कामयाब नहीं होगा। इस देश की नींव प्रेम और भाईचारे पर टिकी है। हमें हिंदुस्तान के लोगों की अंतरात्मा पर पूरा भरोसा है कि वे अंततः एकता, सद्भाव और प्रेम की राह पर वापस लौट आएंगे।

--आईएएनएस

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