भरत तिवारी एनकाउंटर के वक्त वहां एसडीएम क्या कर रहे थे, पूर्व डीजीपी अभयानंद ने मौजूदगी पर उठाए सवाल
पटना, 28 जून (आईएएनएस)। बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच पूर्व डीजीपी अभयानंद ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसडीएम की मौजूदगी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के शरीर को गोली कितनी लगी, यह कम महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि फायरिंग कितनी दूरी से हुई।
पटना में आईएएनएस से बातचीत में पूर्व डीजीपी ने कहा कि पुलिस एक्शन दो तरह का होता है। एक तब जब भीड़ हो, जमावड़ा हो या लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति हो। ऐसे में मजिस्ट्रेट और पुलिस दोनों तैनात होते हैं, लेकिन इस केस में एक व्यक्ति को पकड़ने पुलिस गई थी। मुझे समझ नहीं आ रहा कि एसडीएम वहां क्या कर रहे थे। यह मजमा वाला मामला नहीं था।
उन्होंने बताया कि जब भी कोई मजिस्ट्रेट तैनात होता है तो डीएम और एसपी मिलकर जॉइंट ऑर्डर जारी करते हैं। मुझे नहीं पता कि इस मामले में जॉइंट ऑर्डर जारी हुआ था या नहीं। अगर नहीं हुआ था तो हो सकता है। पूर्व डीजीपी ने कहा कि एसडीएम का क्राइम या रेड से कोई संबंध नहीं होता।
अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि हमने कभी नहीं देखा कि क्राइम या रेड के दौरान डीएम या एसडीएम साथ गए हों। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी डीएम रहते हैं, लेकिन यहां तो अलग मामला था।
अभयानंद ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि यह एक मामला है जो मेरे दिमाग में परेशानी पैदा कर रहा है। साजिश हो सकती है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता। जांच करने वाली टीम अगर ठीक ढंग से जांच करे तो सच्चाई जरूर सामने आएगी।
भरत तिवारी के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का जिक्र करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि मैंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं देखी है, लेकिन गोली तीन लगी या पांच यह महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे जरूरी यह है कि कितनी दूरी से गोली चलाई गई।
भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद विपक्ष समेत कई सामाजिक संगठनों ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा धमकाया जा रहा है, जबकि पुलिस का दावा है कि परिवार के किसी भी सदस्य को धमकाए जाने की बात गलत है। सभी को इंतजार है कि जल्द ही जांच रिपोर्ट पूरी हो और सच्चाई सामने आए।
--आईएएनएस
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