भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी को नई रफ्तार, माइग्रेशन से लेकर तकनीक तक 5 समझौतों पर सहमति
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने रिश्तों को नया आयाम देने की कोशिश के तहत विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने पर सहमति जताई। दोनों देश केवल व्यापार और निवेश तक सीमित रखने के बजाय लोगों की आवाजाही, युवा पेशेवरों, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप जैसे नए क्षेत्रों तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़े। स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पांच महत्वपूर्ण समझौते और सहयोग से जुड़े दस्तावेज तय किए गए। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।
बताया गया कि इनमें सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (एमएमपी) से जुड़ा समझौता है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देना तथा समान व्यवहार के सिद्धांतों के तहत माइग्रेशन सहयोग को मजबूत करना है।
समझौते में अनियमित प्रवासन, मानव शोषण और मानव तस्करी को रोकने के साथ ही उससे निपटने के लिए सहयोग करने का प्रावधान है। इसके तहत पांच साल तक की अवधि के लिए मल्टीपल-एंट्री वीजा की सुविधा का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक यात्रा में छह महीने तक रहने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके अलावा छात्रों के लिए एक वर्ष की अवधि वाले नवीकरणीय परमिट की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
दोनों देशों ने युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान के लिए भी एक समझौते पर सहमति जताई है। यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (वाईपीएस) के तहत दोनों देशों के युवा पेशेवर दूसरे देश में सीमित अवधि के लिए काम कर सकेंगे। इसका उद्देश्य उन्हें अपने पेशेवर क्षेत्र में अनुभव हासिल करने के साथ-साथ भाषा और व्यावहारिक कौशल विकसित करने का अवसर देना है।
इस योजना के तहत हर साल प्रत्येक देश से 300 युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान का प्रावधान होगा। जरूरत और सहमति के आधार पर यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है। राष्ट्रीयता और निवास की स्थिति के सत्यापन के लिए 30 से 90 दिनों की समयसीमा भी तय की गई है।
भारत और स्विट्जरलैंड ने परिवहन तकनीक, मोबिलिटी सिस्टम और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी एक समझौता किया है। यह समझौता भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स, एजुकेशन एंड रिसर्च के बीच हुआ है।
इसके तहत टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, सुरंगों और परिवहन के अन्य क्षेत्रों में नई तकनीकों तथा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे।
वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने लंबी अवधि के सहयोग की नींव रखने की कोशिश की है। भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति बनी है।
इसका उद्देश्य दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना, नए संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी विकसित करना और साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक वैज्ञानिक परियोजनाओं के लिए व्यापक ढांचा तैयार करना है। स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढ़ाने की योजना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप को लेकर एक इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट तय किया गया है।
इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए इंडो-स्विस एकेडमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग (एआईटी इंडिया) कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाएं, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग शामिल होगी।
दोनों देशों ने भारत-स्विस अनुसंधान सहयोग को और व्यापक बनाने के लिए एक नए फ्लैगशिप कार्यक्रम की शुरुआत की भी घोषणा की है। इसका उद्घाटन सत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
ये समझौते ऐसे समय हुए हैं जब भारत और स्विट्जरलैंड अपने आर्थिक संबंधों को भी नई गति देने की कोशिश कर रहे हैं। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है।
स्विस राष्ट्रपति की 5 से 7 अक्टूबर तक की राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ने सोमवार को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, नवाचार, मोबिलिटी और लोगों के बीच संपर्क सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस पूरी प्रक्रिया से यह संकेत मिलता है कि भारत-स्विट्जरलैंड संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक साझेदारी से आगे बढ़कर लोगों, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को जोड़ने वाली व्यापक साझेदारी का रूप ले रहे हैं।
--आईएएनएस
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