भारत-पाक बातचीत की अपील पर भाजपा बोली-सीमा पर आतंकवाद रुके, तभी आगे बढ़ेगी बात
नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने और सामान्य संबंध बहाल करने की अपील पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा नेताओं का कहना है कि भारत कभी भी शांति वार्ता के खिलाफ नहीं रहा, लेकिन बातचीत तभी संभव है जब पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद करे।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने कहा, "भारत ने कब कहा कि वह शांति नहीं चाहता? पाकिस्तान एक तरफ शांति की बात करता है और दूसरी तरफ घुसपैठ, सीमा पार फायरिंग और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। भारत ने कभी बातचीत से इनकार नहीं किया। भारत ने सिर्फ इतना कहा है कि सार्थक बातचीत तभी हो सकती है, जब पाकिस्तान आतंकवाद को प्रायोजित करना बंद करे।"
उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने यह अपील की है, उन्हें पाकिस्तान जाकर वहां भी यही संदेश देना चाहिए। भारत ने कभी यह नहीं कहा कि वह अपने किसी भी पड़ोसी देश के साथ अच्छे संबंध नहीं चाहता। हमारी सिर्फ एक शर्त है कि सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ बंद होनी चाहिए। तभी भारत हमेशा अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए तैयार है।"
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा, "सरकार संवेदनशील है और विदेश मंत्रालय सभी मुद्दों पर लगातार नजर रखता है। लोगों को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन सरकार देश के सम्मान, गरिमा और संप्रभुता से कोई समझौता किए बिना आगे बढ़ती है।"
उधर, बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पत्र लिखने वाले लोगों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ये 117 लोग कौन हैं, जिन्होंने यह पत्र लिखा है? इनके बारे में देखिए। इनमें फारूक अब्दुल्ला, राजद के नेता और ऐसे लोग शामिल हैं, जो कश्मीर के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान जैसी सोच रखते हैं या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के पक्ष में बोलते हैं। एक तरह से ये लोग पाकिस्तान का झंडा बुलंद कर रहे हैं।"
संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री पहले ही साफ कर चुके हैं कि 'ऑपरेशन सिंदूर' खत्म नहीं हुआ है, बल्कि केवल फिलहाल स्थगित किया गया है।
उन्होंने कहा, "जिस तरह पाकिस्तान लगातार आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है, उसे देखते हुए भारत को पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ना होगा।"
भाजपा नेता नारायण दत्त त्रिपाठी ने कहा, "लोगों की अपनी-अपनी राय और जरिए होते हैं। भारत में पहले भी ऐसी कई पहल हो चुकी हैं। आपने देखा होगा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी पाकिस्तान के साथ पहल की थी और वे कई बार पाकिस्तान गए थे। उन्होंने बस सेवा भी शुरू की थी। पाकिस्तान से बातचीत करना कोई बुरी बात नहीं है। ऐसा किया जाना चाहिए। लेकिन कौन मानेगा कि वे अपनी बात पर कायम रहेंगे? कौन भरोसा कर सकता है? ऐसी बातचीत पहले भी कई बार हो चुकी है।"
बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, भारत को शांति का दूत कहा जाता है। शांति का दूत और अमन चयन के कारण ही हम विश्व गुरु का सपना देखते हैं। पूरे दुनिया को इस बात को समझने की आवश्यकता है कि शांति से ही दुनिया चल सकती है, युद्ध से नहीं। अगर किसी तरह की शांति की बात होती है, तो भारत उसमें सबसे अग्रणी रहेगा। हमारा मकसद भी है पूरे दुनिया में अमन चयन और शांति का संदेश देना।
भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखकर आपसी बातचीत बहाल करने और रिश्तों को सामान्य बनाने की अपील की। इसी अपील को लेकर अब देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
--आईएएनएस
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