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भारत ने लिपुलेख मार्ग पर अपने रुख को दोहराया, सीमा मुद्दों पर बातचीत से समाधान पर जोर

नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सीमा मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से साफ और एक जैसा रहा है, और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए करने के लिए भारत तैयार है।
 
भारत ने लिपुलेख मार्ग पर अपने रुख को दोहराया, सीमा मुद्दों पर बातचीत से समाधान पर जोर

नई द‍िल्‍ली, 3 मई (आईएएनएस)। नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सीमा मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से साफ और एक जैसा रहा है, और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए करने के लिए भारत तैयार है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के संबंध विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर लिखा, “इस मामले में भारत का रुख हमेशा से साफ और एक जैसा रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना और इस्तेमाल में रहा रास्ता है, और इस रास्ते से यह यात्रा कई दशकों से चलती आ रही है। यह कोई नई बात नहीं है।

जहां तक सीमा से जुड़े दावों का सवाल है, भारत हमेशा यह कहता आया है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। इस तरह से एकतरफा तरीके से सीमा बढ़ाने के दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते।

भारत, नेपाल के साथ अपने रिश्तों के सभी मुद्दों पर बातचीत और सहयोग के लिए हमेशा तैयार है, जिसमें सीमा से जुड़े लंबित और सहमत मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करना भी शामिल है।”

पिछले हफ्ते, चीन ने घोषणा की थी कि वह 2026 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 1,000 भारतीय तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुगम बनाएगा। यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग और धार्मिक आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने पुष्टि की कि यह तीर्थयात्रा दो स्थापित मार्गों -- लिपुलेख दर्रा और सिक्किम के नाथू ला दर्रे -- के माध्यम से जत्थों में आयोजित की जाएगी। इन दोनों मार्गों का उपयोग करते हुए कुल 10 जत्थे यात्रा करेंगे, जिनमें से प्रत्येक में 50 तीर्थयात्री शामिल होंगे।

कैलाश मानसरोवर यात्रा, जिसे हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों के लिए सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक माना जाता है, जून और अगस्त 2026 के बीच आयोजित होने वाली है।

हालांकि, नेपाल लंबे समय से लिपुलेख दर्रे वाले क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है और उसका तर्क है कि भारत और चीन नेपाल की सहमति के बिना इस क्षेत्र के उपयोग के बारे में कोई निर्णय नहीं ले सकते। लिपुलेख दर्रा, कालापानी क्षेत्र में स्थित तीन बिंदुओं में से एक है।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी