भारत में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दौर खत्म; 26,500 तक जा सकता है निफ्टी: गोल्डमैन सैश
मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दौर करीब समाप्त हो गया है और विदशी निवेशकों की कम हिस्सेदारी और मजबूत घरेलू आधार के चलते भारतीय इक्विटी बाजार के लिए धारणा सकारात्मक बनी हुई है। यह जानकारी गोल्डमैन सैश के विश्लेषकों ने जुलाई में अपनी इंडिया स्ट्रैटेजी नोट में दी।
गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के को-हेड और एशिया-पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने अमोरिता गोयल और सुनील कौल के साथ लिखे नोट में कहा है कि निफ्टी जून 2027 तक बढ़कर 26,500 के स्तर पर जा सकता है, जो कि मौजूदा स्तरों से 10 प्रतिशत अधिक है।
नोट में कहा गया कि जुलाई का आउटलुक मई 2026 के उनके रुख से बिल्कुल अलग है, जब उन्हें उत्तर एशिया के दूसरे देशों के मुकाबले भारतीय इक्विटी में रिस्क-रिवॉर्ड का समीकरण 'कम आकर्षक' लगा था। इसके अलावा, उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि विदेशी निवेशक जल्द ही भारतीय बाजार में लौटेंगे, भले ही तेल की कीमतें कम हो जाएं।
मो, गोयल और कौल ने अपने नोट में लिखा है कि 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारत को फंडिंग मार्केट के रूप में उपयोग किया। इस दौरान केवल 3.5 महीने में ही विदेशी निवेशकों ने 30 अरब डॉलर से ज्यादा की भारतीय इक्विटी में बिकवाली की। हालांकि, जून के दूसरे पखवाड़े से विदेशी निवेशक फिर से शुद्ध खरीदार हो गए हैं और इस दौरान उन्होंने करीब दो अरब डॉलर का निवेश किया है।
नोट में आगे कहा गया कि भारतीय इक्विटी में ग्लोबल फंड्स की 'अंडरवेट' स्थिति को देखते हुए, उनके पास अपने स्थिति को संतुलित करने का काफी अच्छा मौका है। हालांकि, लगातार आय के डाउनग्रेड का दौर और दूसरे बाजारों की तुलना में ग्रोथ-वैल्यूएशन का कम आकर्षक जोड़ निवेशकों के लिए मुख्य चिंता का विषय बना रहेगा, लेकिन घरेलू रिकवरी के बारे में बेहतर जानकारी निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक रिकवरी को पहले से ही प्राइस-इन करने के लिए प्रेरित करेगी।"
एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय इक्विटी से 1.28 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। जून में उन्होंने 49,340 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि जुलाई में एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजारों में 15,157 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया।
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