भारत में आजादी से रह रहे हैं मुसलमान, डर की राजनीति से बाहर निकलें: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
बरेली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुस्लिम राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमान बिना किसी डर या खौफ के अपनी धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियां स्वतंत्र रूप से कर रहे हैं। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे नकारात्मक राजनीति और लगातार विरोध की मानसिकता से बाहर निकलकर सकारात्मक राजनीतिक सोच अपनाएं।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि आज मुस्लिम समाज में जहां भी चार लोग बैठते हैं, वहां अक्सर यही चर्चा होती है कि मुसलमान परेशान है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिम्मेदार हैं। एक बुजुर्ग व्यक्ति से हुई बातचीत का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि जब उन्होंने उनसे पूछा कि परेशानी की वास्तविक वजह क्या है, तो वह कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सके। इसके बाद मौलाना ने सवाल किया कि क्या उन्हें पांच वक्त की नमाज पढ़ने से कोई रोकता है, क्या बच्चों को स्कूल भेजने से रोका जाता है, या धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने से कोई प्रशासनिक रोक लगाई जाती है। मौलाना ने कहा कि जब ऐसा कोई अनुभव सामने नहीं आता, तो समाज में लगातार 'मुसलमान परेशान है' की धारणा क्यों बनाई जा रही है, इस पर विचार करने की जरूरत है।
समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए मौलाना ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर कुछ 'सेक्युलर' राजनीतिक दल मुस्लिम इलाकों में जाकर भाजपा के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाते हैं। इसका असर मुस्लिम समाज की राजनीतिक सोच पर पड़ता है। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे भाजपा को हराने की जिम्मेदारी अपने ऊपर न लें।
मौलाना ने सवाल किया कि भाजपा का राजनीतिक मुकाबला करना केवल मुसलमानों की जिम्मेदारी क्यों होनी चाहिए और अन्य विपक्षी दलों को भी अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, शरद पवार, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि भाजपा का मुकाबला करने की जिम्मेदारी केवल मुस्लिम मतदाताओं पर नहीं डाली जानी चाहिए।
मौलाना ने कहा कि पिछले कई वर्षों से भाजपा के विरोध की राजनीति पर जोर दिया गया, लेकिन इसका राजनीतिक लाभ कथित तौर पर अन्य दलों को मिला और मुस्लिम समाज को अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिला। मुसलमानों को केवल किसी पार्टी के विरोध में मतदान करने के बजाय शिक्षा, रोजगार, सामाजिक विकास और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज से कहा कि अब नकारात्मक राजनीति छोड़कर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह के दौर की राजनीति का उदाहरण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति में भाजपा के साथ अलग-अलग समय पर राजनीतिक समीकरण बने हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से राजनीतिक दलों के इतिहास और उनके व्यवहार को समझने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी पार्टी का समर्थन या विरोध केवल भावनात्मक आधार पर नहीं होना चाहिए।
मौलाना ने कहा कि भारत में मुसलमान अपनी रोजमर्रा की जिंदगी स्वतंत्र रूप से जी रहे हैं। मुस्लिम समुदाय धार्मिक कार्यक्रम, सामाजिक गतिविधियां और अपने परिवार से जुड़े कार्य बिना किसी डर के कर रहा है। मुसलमानों को यह समझने की जरूरत है कि भारत उनकी भी मातृभूमि है और उनके पूर्वजों की जमीन है। इसलिए किसी के डर या खौफ में रहने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता मुस्लिम समाज को भयभीत करने की राजनीति करते हैं। मुसलमानों को किसी व्यक्ति से डरने के बजाय अपने धार्मिक विश्वासों के प्रति आस्था रखनी चाहिए। राजनीतिक सत्ता स्थायी नहीं होती और समय के साथ सत्ता बदलती रहती है।
मौलाना ने कहा कि मुस्लिम समाज को आने वाली पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखकर अपनी राजनीतिक दिशा तय करनी चाहिए। केवल विरोध की राजनीति से समाज की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने मुस्लिम समाज से शिक्षा, रोजगार, सामाजिक विकास और सकारात्मक राजनीतिक भागीदारी को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि समाज सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेगा तो नई पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
--आईएएनएस
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