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गुजरात : भारत के कुल सिरेमिक निर्यात में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मोरबी बना देश की ‘सिरेमिक राजधानी’

गांधीनगर, 5 जनवरी (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में गुजरात वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) कच्छ-सौराष्ट्र के दूसरे संस्करण के लिए तैयार हो रहा है। 11 एवं 12 जनवरी, 2026 के दौरान राजकोट में होने वाली वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस कच्छ एवं सौराष्ट्र के हिस्से के रूप में राज्य में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
 
गुजरात : भारत के कुल सिरेमिक निर्यात में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मोरबी बना देश की ‘सिरेमिक राजधानी’

गांधीनगर, 5 जनवरी (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में गुजरात वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) कच्छ-सौराष्ट्र के दूसरे संस्करण के लिए तैयार हो रहा है। 11 एवं 12 जनवरी, 2026 के दौरान राजकोट में होने वाली वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस कच्छ एवं सौराष्ट्र के हिस्से के रूप में राज्य में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।

सिरेमिक उद्योग का अगुवा, गुजरात का मोरबी जिला आज भारत की सिरेमिक अर्थव्यवस्था का आधार स्तंभ बन गया है। गुजरात के कुल सिरेमिक उत्पादन में अकेले लगभग 90 फीसदी हिस्सेदारी के साथ मोरबी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक उत्पादन केंद्र है।

मोरबी आज देश और दुनिया में सिरेमिक उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। शुरुआत में यहां पारंपरिक तरीके से मिट्टी के मटके, दीये, खपरैल और घरेलू मिट्टी के बर्तन बनाए जाते थे। स्थानीय मिट्टी की गुणवत्ता और कारीगरों की कुशलता ने मोरबी के उत्पादों को एक नई पहचान दी। बाद में, वॉल क्लॉक (दीवार घड़ी) उद्योग की शुरुआत हुई।

समय के साथ-साथ, 1970-80 के दशक में रूफ टाइल्स और ग्लेज्ड टाइल्स का उत्पादन शुरू हुआ और धीरे-धीरे मोरबी आधुनिक सिरेमिक उद्योग की दिशा में आगे बढ़ा। नई टेक्नोलॉजी, उन्नत मशीनरी और उद्यमिता के दृष्टिकोण ने इस शहर को सिरेमिक उद्योग के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दी। आज मोरबी फ्लोर टाइल्स, वॉल टाइल्स और विट्रिफाइड टाइल्स के उत्पादन के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। मोरबी का सिरेमिक सफर परंपरा से प्रगति की ओर बढ़ने का बेजोड़ उदाहरण बन गया है।

इस वर्ष राजकोट में आयोजित होने वाली दूसरी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) कच्छ-सौराष्ट्र में मोरबी के सिरेमिक क्लस्टर की एक विशेष प्रदर्शनी होगी, जिसमें ‘अद्यतन सिरेमिक्स’, ‘वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स’, ‘एनर्जी-एफिशिएंट टेक्नोलॉजी’ और नए ‘सिरेमिक पार्क’ की प्रगति मुख्य आकर्षण होंगे। राज्य सरकार उद्योगों के लिए टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, ऑटोमेशन, रिन्यूएबल एनर्जी, वेस्ट रिसाइकिलिंग और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट बढ़ाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। मोरबी के उद्यमियों के परिश्रम, सरकार की प्रभावी नीतियों और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता के कारण आज मोरबी भारत की ‘सिरेमिक राजधानी’ बन गया है।

मोरबी जिले का सिरेमिक क्लस्टर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक उत्पादक क्लस्टर है। मोरबी जिले में लगभग 1200 सिरेमिक इकाइयां हैं, जिनका कुल सालाना उत्पादन लगभग 60 लाख टन है। ये इकाइयां करीब 9 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती हैं।

मोरबी जिले में गत दो वर्षों के दौरान राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं के तहत व्यापक और प्रभावी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जो जिले के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम सिद्ध हो रही है। राज्य सरकार की विभिन्न औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान लगभग 2200 से अधिक लाभार्थियों को सीधे 115 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता पहुंचाई गई है। इस सहायता से मोरबी जिले के नागरिकों को स्वरोजगार, उद्योग, जीवन स्तर में सुधार और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ने के नए अवसर मिले हैं, जो राज्य सरकार की जनकल्याण की प्रतिबद्धता और सर्वांगीण विकास के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है।

मोरबी का सिरेमिक उद्योग वैश्विक बाजार में गुजरात और भारत की मजबूत पहचान बन रहा है। अनुमान के मुताबिक वर्ष 2024-25 के दौरान मोरबी से लगभग 15,000 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। खास बात यह है कि अकेला मोरबी भारत के कुल सिरेमिक निर्यात में 80 से 90 फीसदी का योगदान देता है। यहां बनाए जाने वाले उच्च गुणवत्ता के सिरेमिक टाइल्स और संबंधित उत्पादों को मुख्य रूप से अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ओमान और श्रीलंका जैसे देशों में निर्यात किया जाता है, जो मोरबी की वैश्विक विश्वसनीयता और ‘मेड इन इंडिया-मेड इन गुजरात’ ब्रांड की मजबूत स्थिति को साफ तौर पर उजागर करता है।

गुजरात का मोरबी जिला सिरामिक क्षेत्र की तरह ही पॉलीपैक उद्योग के क्षेत्र में भी निकट भविष्य में राज्य का एक अग्रणी जिला बन सकता है। अभी मोरबी जिले में पीपी (पॉलीप्रोपाइलिन) वूवन प्रोडक्ट की कुल 150 इकाइयां कार्यरत हैं। मोरबी का पॉलीपैक उद्योग अभी सालाना लगभग 5 लाख मीट्रिक टन पीपी वूवन फैब्रिक का उत्पादन करता है, जिसका कुल सालाना टर्नओवर लगभग 5500 करोड़ रुपए है। पॉलीपैक उद्योग आज मोरबी के लगभग 25 से 20 हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान करता है।

सिरेमिक तथा पॉलीपैक के जैसे ही वॉल क्लॉक और गिफ्ट आर्टिकल उद्योग भी मोरबी में बड़े पैमाने पर विकसित हुआ है। भारत के वॉल क्लॉक उत्पादन में मोरबी जिले के वॉल क्लॉक तथा गिफ्ट आर्टिकल उद्योग की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। मोरबी जिले में वॉल क्लॉक की लगभग 150 से 200 इकाइयां हैं। ये उद्योग करीब 10 से 12 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार प्रदान करते हैं, जिनमें से 60 फीसदी महिलाएं हैं।

--आईएएनएस

एसके/