भारत का मुसलमान खुद को असुरक्षित और अपमानित महसूस कर रहा : असद मदनी
नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। इस्लामिक स्कॉलर और राज्यसभा के पूर्व सदस्य असद मदनी ने कहा कि आज भारत का मुसलमान खुद को घिरा हुआ, असुरक्षित और अपमानित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी एक घटना की वजह से नहीं बल्कि कई घटनाओं की एक श्रृंखला के कारण बनी है।
असद मदनी ने कहा कि इतने बड़े देश में जहां 140-150 करोड़ की आबादी है, कुछ घटनाएं होना असामान्य नहीं है। चिंता की बात यह है कि प्रशासन, पुलिस और सरकार, चाहे राज्य की हो या केंद्र की उनका रवैया पक्षपातपूर्ण नजर आता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का काम अन्याय को रोकना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है, अगर वही आंखें मूंद लें तो यह ज्यादा चिंताजनक स्थिति बन जाती है।
उन्होंने कहा कि ईद के दौरान कई जगहों पर लोगों को सड़कों पर नमाज पढ़ने से रोका गया। खासकर उत्तर प्रदेश में इस तरह की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलीं। असद मदनी ने सवाल उठाया कि क्या सड़क पर नमाज पढ़ना गलत है? क्या यह कोई अपराध है? हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार यह नियम बनाती है कि सड़क पर कोई भी धार्मिक गतिविधि नहीं होगी, तो वह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
वहीं, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर उन्होंने कहा कि मौलाना अरशद मदनी ने पहले भी इसका समर्थन किया था और केंद्र सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।
असम में कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर असद मदनी ने कहा कि उनकी भी राय है कि कोई भी विदेशी नागरिक बिना वैध दस्तावेज के भारत में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष तरीके से बाहर किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री उन्हें भी बांग्लादेश भेजने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सिर्फ मुस्लिम ही नहीं बल्कि अन्य समुदायों में भी असंतोष और बेचैनी है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के मुद्दे पर असद मदनी ने कहा कि उन्होंने अभी तक पूरा दस्तावेज नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि संगठन के जिम्मेदार लोग इसे पढ़ने के बाद ही आधिकारिक प्रतिक्रिया देंगे।
--आईएएनएस
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