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भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्राथमिक गारंटर है: रक्षा मंत्री

नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्राथमिक गारंटर है। उन्होंने लगातार जटिल होते वैश्विक सुरक्षा माहौल में राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने और तिरंगे को बुलंद रखने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की। वे 10 जुलाई, 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में छठे स्वदेशी प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरी के कमीशनिंग की पूर्व संध्या पर आयोजित बाराखाना कार्यक्रम में नौसेना कर्मियों को संबोधित कर रहे थे।
 

नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्राथमिक गारंटर है। उन्होंने लगातार जटिल होते वैश्विक सुरक्षा माहौल में राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने और तिरंगे को बुलंद रखने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की। वे 10 जुलाई, 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में छठे स्वदेशी प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरी के कमीशनिंग की पूर्व संध्या पर आयोजित बाराखाना कार्यक्रम में नौसेना कर्मियों को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, जबकि देश की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और द्वीपीय क्षेत्र समुद्री सुरक्षा को उसके आर्थिक विकास और राष्ट्रीय हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बढ़ते भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्र से बाहर की शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति ने समुद्री सतर्कता को और भी मजबूत कर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, भारतीय नौसेना भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा कर रही है, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित कर रही है और पूरे क्षेत्र में देश के हितों की रक्षा कर रही है।

राजनाथ सिंह ने भारत को हिंद महासागर क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे जिम्मेदार हितधारक बताया और शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री वातावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति पर जोर देते हुए महेंद्रगिरि के उद्घाटन को भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का एक और शानदार उदाहरण बताया। उन्होंने राष्ट्र को खतरों और चुनौतियों से बचाने के लिए रक्षा बलों के शौर्य, समर्पण और देशभक्ति की सराहना की और सैनिकों से अपने कौशल को लगातार उन्नत करने, अत्याधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करने और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का सामना करने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया।

युद्ध के स्वरूप में हो रहे तीव्र बदलावों पर जोर देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के संघर्ष नए और अप्रत्याशित रूपों में सामने आ सकते हैं। उन्होंने सैनिकों से शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहने, अपने कौशल को निरंतर उन्नत करने और उभरती प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संघर्ष भी होते हैं जो युद्ध की औपचारिक घोषणा के बिना लड़े जाते हैं। कल का शत्रु अतीत के शत्रु जैसा नहीं होगा। सरकार सैनिकों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ हथियार, प्रौद्योगिकी और संसाधन उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। लेकिन केवल हथियार ही युद्ध नहीं जिताते; युद्ध तो उन्हें चलाने वाले लोग ही जिताते हैं।

इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला और भारतीय नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

--आईएएनएस

एमएस/