'भारत हमारे लिए बड़े भाई जैसा', पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बोले किर्गिज नागरिक
बिश्केक, 31 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान के आधिकारिक दौरे पर हैं। यात्रा के दौरान उनसे देश-विदेश के लोगों ने मुलाकात की। उनसे मिलने वाले लोगों के लिए यह महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी। किसी के लिए यह "जिंदगी भर याद रहने वाला मौका" था, तो किसी के लिए वह क्षण खास था जब टीवी पर दिखाई देने वाले प्रधानमंत्री को पहली बार सामने से देखने का मौका मिला। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद किर्गिस्तान के सैन्य अधिकारियों, योग प्रशिक्षकों और भारत से जुड़े लोगों की भावनाएं जानने की कोशिश आईएएनएस ने की।
किर्गिस्तान के एक सैन्य अधिकारी कैप्टन तालाइबेक ने भारत के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्ते को दोनों देशों के संबंधों की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने भारत की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में तीन साल और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में एक साल प्रशिक्षण लिया है। उनके लिए भारत केवल एक मित्र देश नहीं, बल्कि उनके सैन्य जीवन और व्यक्तिगत अनुभवों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा, “भारत के साथ मेरा रिश्ता बहुत मजबूत है। वहां मेरे दोस्त हैं, मेरे कोर्समेट हैं। आज जब हम दोनों अकादमियों से प्रशिक्षण लेकर बाहर आ चुके हैं, तो हम भारत और किर्गिस्तान के बीच एक पुल की तरह काम कर रहे हैं।”
किर्गिस्तान और भारत के बीच सैन्य सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खंजर’ का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ और सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है।
कैप्टन तालाइबेक के लिए प्रधानमंत्री मोदी से मिलना भी एक विशेष अनुभव रहा।
किर्गिज गणराज्य की महिला कांग्रेस के अंतर्राष्ट्रीय विभाग की प्रमुख गुलाइम एशबायेवा के मुताबिक पीएम मोदी से मुलाकात प्रेरणास्पद थी। उन्होंने कहा, "मैं उनसे मिली और मुझे ये पल हमेशा याद रहेंगे। उनसे मैं बहुत प्रेरित हुई।"
लेफ्टिनेंट तिलेमन ने कहा, ये शानदार थी और कल्पना से परे थे। हमारे देशों के संबंध बहुत सहज हैं। हम लोग साथ मिलकर सैन्य अभियान का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने इसे “लाइफटाइम अपॉर्च्युनिटी” बताते हुए कहा कि हर किसी को किसी देश के प्रधानमंत्री से आमने-सामने मिलने का अवसर नहीं मिलता।
एक अन्य सैन्य अधिकारी सीनियर लेफ्टिनेंट बैमुर मुर्जा ने हिंदी में बात की। उन्होंने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को यादगार बताया। उन्होंने खुद को सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ा अधिकारी बताते हुए कहा कि भारत में प्रशिक्षण के दौरान बनाए गए रिश्ते आज भी उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने अपने भारतीय कोर्समेट्स को संदेश देते हुए कहा, “मैं अपने पुराने कोर्समेट्स और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देना चाहता हूं। सभी के लिए खुशहाल जीवन की कामना करता हूं। प्रधानमंत्री से मिलना बड़ा अवसर था, जो सबको नसीब नहीं होता।”
उन्होंने आगे कहा कि वह मोदी को अब तक सिर्फ टेलीविजन पर देखते थे, लेकिन पहली बार उन्हें सामने से देखने का अवसर मिला। उन्होंने इसे अपने लिए एक बड़ा मौका बताया।
प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत में सिर्फ कूटनीति या राजनीति ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे भी सामने आए।
स्नो लेपर्ड संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े कौस्तुभ शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ उनकी छोटी-सी बातचीत बेहद सार्थक रही। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास की जरूरत पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा, "पहाड़ी क्षेत्रों के लिए पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत छोटी थी, लेकिन वह “बहुत उत्पादक” रही।"
भारत-किर्गिस्तान संबंधों को लेकर शर्मा ने कहा कि दोनों देश पहले से ही अच्छे मित्र हैं और दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव मौजूद है। हालांकि, उनके मुताबिक व्यापार, लोगों के बीच संपर्क, क्षमता निर्माण और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की अभी काफी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, "आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, संरक्षण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाया जा सकता है।"
योग साधक अरीना नियाजबेकोवा ने भारत को किर्गिस्तान का “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि भारत हमेशा किर्गिस्तान के साथ खड़ा रहा है और दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत हैं।
भारत और किर्गिस्तान के रिश्तों में योग एक अलग तरह की कड़ी बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान योग से जुड़े कई लोगों ने भी भारत के प्रति अपनी आत्मीयता व्यक्त की।
किर्गिस्तान की योग प्रशिक्षक लुनारा ने कहा कि भारत और किर्गिस्तान के रिश्ते “बहुत गर्मजोशी भरे” हैं। उन्होंने कहा, “हम भारत का सम्मान करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का अवसर हमारे लिए बहुत खास है।”
उन्होंने भारत में योग सिखाने के अपने अनुभव को भी साझा किया। उनके मुताबिक, उन्होंने भारत में करीब 10 वर्षों तक योग सिखाया है और इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को योग से जोड़ने का अवसर मिला।
एक अन्य योग प्रशिक्षक असिलकान ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में खुद को फिट रखने के लिए योग सीखा था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके जीवन का हिस्सा बन गया और फिर उन्होंने दूसरों को भी योग सिखाना शुरू किया।
उन्होंने कहा, "मेरे लिए योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह सांस लेने, चलने-फिरने और सोचने के तरीके से भी जुड़ा है। योग अब मेरी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है।”
किर्गिस्तान में बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, खासकर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में। बिश्केक में रहने वाले लोगों ने भी भारत और किर्गिस्तान के बीच बढ़ते मानवीय संपर्क को दोनों देशों के रिश्तों की महत्वपूर्ण ताकत बताया।
असिलकान ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध बेहद गर्मजोशी और मित्रता वाले हैं। उन्होंने भारत की यात्रा का अपना अनुभव भी साझा किया और कहा कि किर्गिस्तान में भारतीय छात्रों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संबंधों को मजबूत करती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय छात्र किर्गिस्तान में बड़ी संख्या में पढ़ाई कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच संपर्क लगातार बढ़ रहा है।
--आईएएनएस
केआर/
