भारत अपने मूल्यों व साहस से दुनिया का विश्वास जीतता है : राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। कुछ राष्ट्र अपनी बात शब्दों से कहते हैं। भारत अपने मूल्यों, अपने आचरण और अपने साहस से दुनिया का विश्वास जीतता है। यह बात बुधवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कही। वह, त्रि-सेवा विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान के पूरा होने पर सैन्यकर्मियों के बीच बोल रहे थे। विश्व परिक्रमा नौकायन के इस अभियान को पूरी तरह से तीनों सेनाओं की महिला कर्मियों ने अंजाम दिया है। भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों ने एक ध्वज के तले यह अभियान पूरा किया है।
यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि आज जब पूरा विश्व संयुक्त ऑपरेशन, इंटेग्रिटीड कमांड और मल्टी डोमेन वॉरफेयर की बात कर रहा है, तब आईएएसवी त्रिवेणी ने समुद्र के बीच उस संयुक्ता को जीकर दिखाया है। उन्होंने कहा कि जहाँ समन्वय होता है, वहाँ सामर्थ्य कई गुना बढ़ जाती है। और जहां तीनों सेनाएं साथ चलती हैं, वहां विजय स्वयं रास्ता बना लेती है।
रक्षा मंत्री ने कहा, “आईएएसवी त्रिवेणी आत्मनिर्भर भारत की भी एक जीवंत पहचान है। देश में डिजाइन और निर्मित इस पोत ने पूरी दुनिया के समुद्रों में भारत की तकनीकी क्षमता, हमारे नवाचार और हमारे आत्मविश्वास का परिचय दिया है। यह वेसल, भारत की इंजीनियरिंग एक्सेलेंस, स्वदेशी क्षमता और रणनीतिक आत्मविश्वास का चलता-फिरता प्रमाण था। त्रिवेणी ने जितनी समुद्री मील तय की हैं, उतने ही कदम भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाए हैं।”
रक्षा मंत्री ने महिला सैनिकों से कहा कि आप जहां-जहां गईं, वहां आपने केवल भारत का राष्ट्रीय ध्वज ही नहीं पहुंचाया बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी परिचय कराया। विभिन्न देशों के बंदरगाहों पर आपके संवाद, आपके व्यवहार और आपके व्यक्तित्व ने भारत की उस सॉफ्ट पावर को भी मजबूत किया, जिसकी आज पूरी दुनिया प्रशंसा करती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो त्रिवेणी केवल एक समुद्री पोत नहीं रहा। यह भारत की समुद्री कूटनीति का चलता-फिरता दूत बन गया।
उन्होंने कहा कि अभियान का यह अत्यंत प्रेरणादायक पक्ष है, कि इस पूरे अभियान का नेतृत्व हमारी महिला अधिकारियों ने किया। आज भारत की नारी केवल अवसर की प्रतीक्षा नहीं करती, बल्कि अवसरों का निर्माण करती है। वह केवल भागीदारी नहीं करती, बल्कि नेतृत्व करती है। वह केवल इतिहास पढ़ती नहीं, बल्कि इतिहास रचती भी है। आज देश की प्रत्येक बेटी, त्रिवेणी की इस यात्रा में अपना भविष्य देख रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इतिहास इस अभियान को केवल एक समुद्री अभियान के रूप में याद नहीं करेगा। इसे उस दिन के रूप में याद किया जाएगा, जब भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों ने एक ही ध्वज, एक ही संकल्प और एक ही उद्देश्य के साथ, पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की शक्ति उसकी एकता में है।
रक्षा मंत्री ने कहा, “यह उस नए भारत का उत्सव है, जो चुनौतियों को देखकर रुकता नहीं, बल्कि उन्हें पार करके इतिहास लिखता है। कुछ यात्राएं बस दूरी नहीं नापतीं, वे इतिहास लिखती हैं। ‘त्रिवेणी’ की यह यात्रा भी ऐसी ही यात्रा है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि आपने केवल पृथ्वी की परिक्रमा नहीं की बल्कि करोड़ों भारतीयों के हृदयों को भी गर्व से भर दिया है।
-आईएएनएस
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