भाई के बाद बहन ने लगाया तिरंगा, वैशाली ने टोक्यो में जीता डब्ल्यूआर विमेंस चेस टूर
मुंबई, 6 जून (आईएएनएस)। ग्रैंडमास्टर (जीएम) रमेशबाबू प्रज्ञानंद के नॉर्वे चेस का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचने के कुछ ही घंटों बाद, उनकी बहन आर वैशाली ने डब्ल्यूआर विमेंस चेस टूर के पहले इवेंट का खिताब अपने नाम कर लिया है।
जापान के टोक्यो में आयोजित डब्ल्यूआर वर्ल्ड चैंपियनशिप चैलेंजर वैशाली ने आठ खिलाड़ियों वाले रैपिड इवेंट में शानदार प्रदर्शन किया। इस इवेंट में टाइम कंट्रोल 15 मिनट का था, जिसमें हर चाल के बाद 10 सेकंड का समय जुड़ता गया।
24 वर्षीय वैशाली रूस की एलेक्जेंड्रा कोस्टेनियुक और कैटरीना लैग्नो, और बुल्गारिया की एंटोएनेटा स्टेफानोवा से आगे रहीं। मुकाबले में शामिल अन्य खिलाड़ियों में अन्ना सरगस्यान, इरीन सुकंदर, अलुआ नूरमान और अजुमी सकाई थीं।
चेन्नई की 24 वर्षीय वैशाली ने फाइनल में कजाकिस्तान की आईएम अलुआ नूरमान को हराकर अपनी काबिलियत साबित की। उन्होंने दो गेम के मुकाबले में 1.5-0.5 से जीत हासिल की। वैशाली ने पूर्व महिला वर्ल्ड चैंपियन कोस्टेनियुक को भी इसी 1.5-0.5 के अंतर से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। क्वार्टर फाइनल में, वैशाली ने आईएम इरीन सुकंदर को हराया था; उन्होंने एक गेम जीता और दूसरा ड्रॉ खेला, जिससे नतीजा 1.5-0.5 रहा।
रैपिड खिताब जीतने के बाद, वैशाली अब रविवार से शुरू होने वाले ब्लिट्ज इवेंट को जीतकर 'डबल' (दो खिताब) हासिल करने की कोशिश करेंगी।
इससे कुछ घंटे पहले, शुक्रवार रात प्रज्ञानंद ने सुपर टूर्नामेंट में अब तक की सबसे शानदार वापसी करते हुए इतिहास रचा था। उन्होंने क्लासिकल चेस इवेंट के 10वें और आखिरी राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराकर नॉर्वे चेस चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का कारनामा किया।
इस जीत के साथ, चेन्नई के 20 वर्षीय खिलाड़ी ने 1,00,000 डॉलर का टॉप प्राइज जीता। सफेद मोहरों से खेलते हुए, प्रज्ञानंद ने मिडिल-गेम में कीमर की कुछ गलतियों का फायदा उठाया और 45वीं चाल में जीत हासिल की। उन्होंने टूर्नामेंट का समापन 18 अंकों के साथ किया, जिसमें पांच जीत, दो हार और दो ड्रॉ शामिल थे; दोनों ड्रॉ वाले मुकाबले उन्होंने आर्मागेडन गेम में जीते।
--आईएएनएस
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