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बंगाल में भगवती को समर्पित 7वीं सदी का अद्भुत मंदिर, जो कहलाता है 'त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण टावर'

दुर्गापुर, 2 मई (आईएएनएस)। देश-दुनिया में भगवती को समर्पित कई भव्य और प्राचीन मंदिर हैं। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर के पास गौरांगपुर में स्थित इच्छाई घोषेर देउल (इच्छाई घोषेर मंदिर) 7वीं शताब्दी का एक शानदार प्राचीन मंदिर है। देवी भगवती को समर्पित यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
 
बंगाल में भगवती को समर्पित 7वीं सदी का अद्भुत मंदिर, जो कहलाता है 'त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण टावर'

दुर्गापुर, 2 मई (आईएएनएस)। देश-दुनिया में भगवती को समर्पित कई भव्य और प्राचीन मंदिर हैं। पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर के पास गौरांगपुर में स्थित इच्छाई घोषेर देउल (इच्छाई घोषेर मंदिर) 7वीं शताब्दी का एक शानदार प्राचीन मंदिर है। देवी भगवती को समर्पित यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

स्थानीय लोग भगवती के इस मंदिर को ‘त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण टावर’ भी कहते हैं। यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के नजरिए से भी बेहद मूल्यवान है। इच्छाई घोषेर देउल को रेखा-देउल शैली में बनाया गया है। इसकी संरचना मुख्य रूप से ईंटों से बनी है। इस वजह से इसे ईंटा मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर की दीवारें जटिल नक्काशीदार टेराकोटा पैनलों से सजी हैं, जिनमें पौराणिक दृश्य और आकृतियां उकेरी गई हैं। इसमें हिंदू और बौद्ध स्थापत्य शैली का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।

मंदिर की ऊंचाई लगभग 18 मीटर है। इसका गर्भगृह लगभग वर्गाकार है और इसमें खिड़कियां नहीं हैं। विद्वानों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 7वीं से 11वीं शताब्दी के बीच हुआ माना जाता है, हालांकि कुछ इतिहासकार इसे 16वीं-18वीं शताब्दी का भी बताते हैं।

स्थानीय किंवदंती के मुताबिक, इच्छाई घोष नामक व्यक्ति ने देवी भगवती के सम्मान में यह मंदिर बनवाया था। बाद में उनके वंशजों ने इसकी देखभाल की और इसे अमर बनाए रखा। मंदिर की एक खास बात यह है कि ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडिया कंपनी के समय इसे निगरानी मीनार या मानचित्रण टावर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता था। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे ‘त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण टावर’ कहते हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसका निर्माण राजा चित्रसेन राय या रानी बिष्णुकुमारी ने करवाया होगा।

मंदिर एशियाटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई) द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों में शामिल है। इसका आधार लगभग 20 फीट चौड़ा है। इसकी चिकनी और घुमावदार दीवारें देखने लायक हैं। मंदिर के आसपास नदी बहती है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।

इच्छाई घोषेर देउल का इतिहास प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए एक लोकप्रिय जगह है। त्योहारों व पर्व के मौके पर यहां जुलूस, अनुष्ठान, संगीत और नृत्य कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जो इस जगह को सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध बनाते हैं।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम