भगत सिंह का राष्ट्र सम्मान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का जज्बा नौजवानों की हिम्मत और हौसले का प्रतीक: पीएम मोदी
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद भगत सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र के सम्मान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का भगत सिंह का जज्बा भारत के नौजवानों की हिम्मत और हौसले का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "शहीद भगत सिंह को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। अपने अदम्य साहस और शौर्य से उन्होंने आजादी के आंदोलन को नई धार दी। राष्ट्र के सम्मान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का उनका जज्बा भारत के नौजवानों की हिम्मत और हौसले का प्रतीक है।"
इसके साथ ही, उन्होंने एक वीडियो संदेश भी शेयर किया। इसमें पीएम मोदी ने कहा, "अमर शहीद भगत सिंह हर भारतवासी, विशेषकर देश के युवाओं के लिए प्रेरणापुंज हैं। निर्भीकता उनके स्वभाव में कूट-कूटकर भरी है। देश के लिए फांसी के फंदे पर झूलने से पहले भगत सिंह जी ने अंग्रेजों को पत्र भी लिखा। "
पीएम मोदी ने आगे कहा, "उन्होंने कहा था कि 'आप मुझे और मेरे साथियों से युद्धबंदी जैसा व्यवहार करें। इसलिए हमारी जान फांसी से नहीं, सीधा गोली मारकर ली जाए। यह उनके अदम्य साहस का प्रमाण है।"
उन्होंने कहा, "भगत सिंह जी लोगों की पीड़िता के प्रति भी बहुत संवेदनशील थे और उनकी मदद में हमेशा आगे रहते थे। मैं शहीद भगत सिंह को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"
साल 1907 में 28 सितंबर की तारीख को क्रांति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने वाले क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह का जन्म स्वतंत्रतापूर्व पंजाब प्राप्त में हुआ था। उन्होंने ताकत के बल पर आजादी दिलाने की ठानी थी और क्रांति के पर्याय बनकर अमर हो गए। जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय भगत सिंह की उम्र महज 12 साल की थी। साल 1920 में महात्मा गांधी के 'असहयोग आंदोलन' से प्रभावित होकर भगत सिंह ने स्कूल छोड़ दिया था और आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे।
भगत सिंह ने साथी क्रांतिकारियों के साथ मिलकर लाला लाजपत राय के बलिदान का बदला लेने के लिए अंग्रेज अधिकारी सांडर्स को मारा था। इससे भगत सिंह पूरे देश में एक क्रांतिकारी की पहचान बन गए। 8 अप्रैल 1929 के दिन उन्होंने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा लगाते हुए 'सेंट्रल अंसेबली' में बम फेंका था। बाद में भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और अन्य क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला। क्रांतकारियों से भयभीत हुई अंग्रेजी हुकूमत ने 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी थी।
--आईएएनएस
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