Aapka Rajasthan

बेंगलुरु स्थित सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह में शामिल हुए उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को बेंगलुरु स्थित सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीएमआरआईटी) के रजत जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों की विशिष्ट सेवा पूरी करने पर संस्थान को बधाई दी।
 
बेंगलुरु स्थित सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह में शामिल हुए उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को बेंगलुरु स्थित सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीएमआरआईटी) के रजत जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में 25 वर्षों की विशिष्ट सेवा पूरी करने पर संस्थान को बधाई दी।

उपराष्ट्रपति ने रजत जयंती को महज एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि दूरदर्शिता, दृढ़ता और उद्देश्य का उत्सव बताया। उन्होंने सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की इस मूल मान्यता के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की कि तकनीकी शिक्षा से न केवल कुशल पेशेवर तैयार हों, बल्कि जिम्मेदार नागरिक और नैतिक नेता भी बनें। उन्होंने संस्थान को एनएएसी द्वारा सर्वोच्च ए++ ग्रेड से मान्यता प्राप्त होने पर खुशी व्यक्त की और इस अवसर पर इनक्यूबेशन सेंटर और सभागार का उद्घाटन किया।

अपने राज्यपाल के रूप में अपने अनुभव को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के ग्रेडिंग और गुणवत्ता में सुधार पर लगातार जोर दिया था। उन्होंने कहा कि संस्थानों की खराब ग्रेडिंग अक्सर शिक्षकों के रिक्त पदों का परिणाम होती है, और शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करने से शैक्षणिक मानकों, विश्वसनीयता और जनविश्वास में प्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होती है।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने सलाह दी कि वे स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें और दूसरों से अपनी तुलना किए बिना अपनी गति से उनकी ओर बढ़ें। उन्होंने कहा कि भाग्य हर किसी का साथ नहीं देता, लेकिन कड़ी मेहनत और ईमानदारी से सफलता अवश्य मिलती है, भले ही तुरंत न मिले, लेकिन निश्चित रूप से समय के साथ मिल ही जाती है।

भारत की नवाचार-संचालित विकास यात्रा का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश अब केवल प्रौद्योगिकी को अपनाने वाला देश नहीं है, बल्कि प्रौद्योगिकी निर्माता के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के वैज्ञानिकों को आह्वान किया था, तब देश ने चुनौती का सामना करते हुए सफलतापूर्वक अपने टीके विकसित किए, जो भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।

डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सीएमआरआईआईटी की सराहना की, जिसने अपने नवाचार और इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से 50 से अधिक स्टार्टअप को बढ़ावा दिया है और एक जीवंत और मजबूत उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान दिया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा संस्थान युवाओं के मार्गदर्शक हैं और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में अपरिहार्य भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य एक मजबूत और शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करना है, यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कभी भी भारत माता पर शर्तें न थोप सके।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय शक्ति आत्मनिर्भरता, ज्ञान, नवाचार और नैतिक आत्मविश्वास पर आधारित होनी चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह भारत के युवाओं को भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रदान करती है, बहुविषयक शिक्षा को प्रोत्साहित करती है और भारतीय संस्कृति, परंपरा और लोकाचार में गहराई से निहित है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को हर प्रकार की लत से सावधान किया और उनसे मादक पदार्थों के सेवन के खतरों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं से 'नशीली दवाओं को ना कहें' का आह्वान किया और अपने साथियों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा।

रजत जयंती को एक मील का पत्थर और आत्मचिंतन का क्षण बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह न केवल उपलब्धियों का जश्न मनाने का अवसर है, बल्कि समाज की बेहतर सेवा करने, जिम्मेदारी से नवाचार करने और मूल मूल्यों को खोए बिना प्रासंगिक बने रहने के प्रति प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का भी अवसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अपनी मजबूत नींव, दूरदर्शी नेतृत्व और युवा ऊर्जा के साथ, भारत को विकसित भारत की ओर ले जाने में सार्थक योगदान देना जारी रखेगा।

--आईएएनएस

एएमटी/एमएस