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पेइचिंग में ‘रीडिंग वीक’ ने मजबूत किए भारत-चीन के सांस्कृतिक संबंध, टैगोर-थीम वाली कलाकृति बनी विशेष आकर्षण

बीजिंग, 26 जुलाई (आईएएनएस)। चीन में भारतीय दूतावास और होराइजन इनसाइट्स सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में 24 से 31 जुलाई, 2026 तक आयोजित ‘रीडिंग वीक’साहित्य और संस्कृति के माध्यम से भारत और चीन के बीच संवाद को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। सप्ताहभर चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य पुस्तक प्रेमियों को दोनों देशों की उत्कृष्ट साहित्यिक परंपराओं से परिचित कराना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
 

बीजिंग, 26 जुलाई (आईएएनएस)। चीन में भारतीय दूतावास और होराइजन इनसाइट्स सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में 24 से 31 जुलाई, 2026 तक आयोजित ‘रीडिंग वीक’साहित्य और संस्कृति के माध्यम से भारत और चीन के बीच संवाद को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। सप्ताहभर चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य पुस्तक प्रेमियों को दोनों देशों की उत्कृष्ट साहित्यिक परंपराओं से परिचित कराना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में चीनी पक्ष ने रू शि, एलीन चांग, लिन हुईन, शेन कॉन्गवेन और सनमाओ जैसे प्रतिष्ठित चीनी साहित्यकारों की क्लासिक रचनाओं की अनुशंसा की। वहीं भारतीय पक्ष ने यात्रा, इतिहास, योग, भारतीय खान-पान और भारतीय संस्कृति से सम्बंधित पुस्तकों को पाठकों के लिए प्रस्तुत किया। आयोजन भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र और होराइजन इनसाइट्स सेंटर के पारंपरिक चीनी संस्कृति अनुभव हॉल में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमियों ने भाग लिया।

रीडिंग वीक के पहले दिन, 24 जुलाई को, होराइजन इनसाइट्स सेंटर ने भारतीय दूतावास को “चीन और भारत के बीच लाइलैक का काव्यात्मक आकर्षण” शीर्षक वाली एक विशेष टैगोर-थीम आधारित कलाकृति भेंट की। यह हस्तनिर्मित कलाकृति भारतीय वॉटरकलर कागज़ पर तैयार की गई है, जिसमें पेइचिंग के ऐतिहासिक फायुआन मंदिर से संजोए गए सूखे लाइलैक के फूलों को कलात्मक रूप से जड़ा गया है।

हाओहान थिंक टैंक के कला निदेशक और सुलेखकार वांग यी द्वारा तैयार इस कलाकृति में पारंपरिक चीनी लघु नियमित लिपि (स्मॉल रेगुलर स्क्रिप्ट) में चार महत्वपूर्ण साहित्यिक विषयों को अंकित किया गया है। इनमें 1924 में चीन यात्रा के दौरान गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा फायुआन मंदिर में लाइलैक पर लिखी गई कविता, बौद्ध आचार्य मास्टर ताइक्सू द्वारा महात्मा गांधी और टैगोर को समर्पित कविताएं, महात्मा गांधी के चयनित विचार तथा बीजिंग सेकंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी के शिक्षक सोंग चुनमिंग की लाइलैक विषयक मौलिक कविताएं शामिल हैं।

यह कलाकृति केवल एक कलात्मक रचना नहीं, बल्कि भारत और चीन की साझा सांस्कृतिक स्मृतियों का सजीव दस्तावेज है। भारतीय हस्तनिर्मित कागज, फायुआन मंदिर के लाइलैक और पारंपरिक चीनी सुलेख के माध्यम से यह कृति दोनों देशों के साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों को एक सूत्र में पिरोती है।

फायुआन मंदिर भारत-चीन सांस्कृतिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। लगभग एक शताब्दी पहले गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी चीन यात्रा के दौरान यहीं लाइलैक से प्रेरित होकर कविता लिखी थी। उसी ऐतिहासिक विरासत को आधार बनाकर तैयार की गई यह कलाकृति अतीत और वर्तमान के बीच सांस्कृतिक संवाद का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।

आयोजकों का मानना है कि रीडिंग वीक केवल पुस्तकों को पढ़ने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह साहित्य, कला और विचारों के माध्यम से लोगों को जोड़ने की एक सार्थक पहल है। ऐसे आयोजन दोनों देशों के बीच आपसी समझ, मित्रता और सांस्कृतिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

--आईएएनएस

डीकेपी/