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बतौर मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी का आखिरी कार्यकाल हो सकता है, इसलिए वह परेशान हैं : बीएल वर्मा

नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कोलकाता स्ट्रॉन्ग रूम विवाद पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बतौर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आखिरी कार्यकाल हो सकता है। इसीलिए बौखलाहट में वह स्ट्रांगरूम के बाहर धरने पर बैठीं।
 
बतौर मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी का आखिरी कार्यकाल हो सकता है, इसलिए वह परेशान हैं : बीएल वर्मा

नई दिल्‍ली, 1 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कोलकाता स्ट्रॉन्ग रूम विवाद पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा कि बतौर मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी का आखिरी कार्यकाल हो सकता है। इस‍ीलिए बौखलाहट में वह स्‍ट्रांगरूम के बाहर धरने पर बैठीं।

दरअसल, बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद छेड़छाड़ की आशंका को लेकर तृणमूल नेताओं ने ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के पास धरना शुरू किया था।

नित्यानंद राय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने पीएम मोदी के काम पर भरोसा जताया है, जबकि ममता बनर्जी के शासन में आम जनता को हिंसा, गुंडागर्दी और अपराधों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में दुष्कर्म और हिंसा जैसी घटनाएं सरकार की पहचान बन गई हैं और सीमा सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर भी राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है, जिससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

वहीं, दिल्ली में केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में एजेंटों की भूमिका अहम होती है और चुनाव आयोग द्वारा सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाती हैं। उन्होंने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं और चुनाव आयोग के कामकाज में हस्तक्षेप करना चाहती हैं। मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें एक उम्मीदवार के रूप में प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होता, तो यह उनकी जिम्मेदारी है और कैमरों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ममता बनर्जी का यह कार्यकाल उनका अंतिम हो सकता है और मौजूदा परिस्थितियां उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर रही हैं।

इसी बीच, जम्मू-कश्मीर के पंपोर में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह चुनाव से पहले ईवीएम की निगरानी में विश्वास नहीं रखते, लेकिन चुनाव के बाद उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने पुराने बैलेट बॉक्स के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर निगरानी रखी जाती थी। ममता बनर्जी को भी निगरानी का अधिकार है, लेकिन उन्होंने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए मतदाता सूची में बदलाव किए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया के परिणाम सही साबित हुए, तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय होगा।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम