बांकीपुर हार के बाद राजद में संगठनात्मक मंथन, तेजस्वी के नेतृत्व में नई टीम की तैयारी तेज
पटना, 10 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी ने बिहार में प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक की सभी कमेटियों को भंग कर दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव नई टीम में किन चेहरों को जगह देते हैं और संगठन की कमान किस तरह नए सिरे से तय करते हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नई टीम के गठन में तेजस्वी यादव अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकते हैं। लालू प्रसाद यादव के पुराने और करीबी नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि पार्टी के मुश्किल दौर में साथ खड़े रहे वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का इस्तेमाल संगठन को मजबूत करने में किया जाएगा।
वहीं, जिन नेताओं का कोई प्रभावी विकल्प नहीं है, उन्हें उनकी उम्र और भूमिका के अनुरूप जिम्मेदारी देकर सम्मान बनाए रखने की रणनीति अपनाई जा सकती है। इसके साथ ही तेजस्वी यादव अपने भरोसेमंद और करीबी नेताओं को भी संगठन में अहम स्थान देने पर विचार कर रहे हैं। युवा चेहरों को आगे लाने के साथ-साथ ऐसे कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है, जिनकी संगठन और जमीनी राजनीति पर मजबूत पकड़ है।
राजद के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2025 के विधानसभा चुनाव में पार्टी 25 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। चुनाव के बाद कई चर्चित नेताओं के पार्टी छोड़कर दूसरे दलों का रुख करने से संगठन को लेकर सवाल भी उठे हैं। अब नई टीम के जरिए पार्टी इन चुनौतियों का जवाब तलाशने की कोशिश करेगी। वहीं, बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों ने पार्टी के भीतर मतभेद को भी सतह पर ला दिया है।
राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच जुबानी जंग ने संगठनात्मक स्थिति को लेकर चर्चा और तेज कर दी है। ऐसे में नई कमेटियों का गठन केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बीच लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने भी नई टीम के गठन को लेकर अपनी अपेक्षाएं जाहिर की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पार्टी की इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग करने का निर्णय काफी पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई इकाइयों के पुनर्गठन में कट्टर लालूवादियों, वर्षों से निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं, संगठन की समझ रखने वालों और जमीन से जुड़े जुझारू नेताओं को प्राथमिकता मिलेगी।
रोहिणी ने यह भी कहा कि जमीन से जुड़े लोगों तथा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिए पर खड़े वर्गों को आगे लाना और कार्यकर्ताओं को उचित अवसर व पद देना लालू प्रसाद की हमेशा प्राथमिकता रही है। उनके मुताबिक, लालू प्रसाद के सिद्धांतों और दिखाए रास्ते पर चलकर ही राजद को मजबूती दी जा सकती है।
--आईएएनएस
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