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बैंक फ्रॉड केस में सीबीआई कोर्ट का फैसला, तीन अधिकारियों को 7 साल की सजा

जयपुर, 22 सितंबर (आईएएनएस)। बैंक फ्रॉड के एक मामले में जयपुर की सीबीआई कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) के तीन लोक सेवकों को 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 18 सितंबर को सुनाया गया।
 

जयपुर, 22 सितंबर (आईएएनएस)। बैंक फ्रॉड के एक मामले में जयपुर की सीबीआई कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई की है। कोर्ट ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) के तीन लोक सेवकों को 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 18 सितंबर को सुनाया गया।

सजा पाने वाले अधिकारियों में रामजी लाल मीणा (तत्कालीन ब्रांच मैनेजर), मुरारी लाल मीणा(तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट) और थान सिंह लश्कर (चपरासी कम हाउसकीपर) शामिल हैं। ये तीनों ओबीसी की श्योसिंहपुरा, लालसोट, दौसा ब्रांच में तैनात थे। कोर्ट ने तीनों पर 85,000-85,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

सीबीआई ने इस मामले में 1 फरवरी 2019 को केस दर्ज किया था। यह केस ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन डिप्टी जनरल मैनेजर की शिकायत पर दर्ज हुआ था।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुरारी लाल मीणा ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने बेईमानी से बिना अधिकार के 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' जारी कर दिए। इससे बैंक में गिरवी रखी गई संपत्तियों को लोन बकाया होने के बावजूद रिलीज कर दिया गया। इस धोखाधड़ी के चलते बैंक को तीन लोन अकाउंट में कुल 12,14,660.71 रुपए का नुकसान हुआ।

मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 5 मई 2022 को तीनों आरोपी लोक सेवकों मुरारी लाल मीणा, रामजी लाल मीणा और थान सिंह लश्कर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लंबे ट्रायल के बाद कोर्ट ने तीनों को दोषी पाया और सजा सुनाई। कोर्ट ने माना कि तीनों ने मिलकर बैंक को नुकसान पहुंचाया और अपने पद का दुरुपयोग किया।

बता दें कि इससे पहले 21 सितंबर को मुंबई में सीबीआई ने उत्तराखंड के ऋषिकेश से सीजीएसटी के एक अधिकारी को 40 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला महाराष्ट्र के रायगढ़ की एक कंपनी के खिलाफ चल रही कार्रवाई से जुड़ा था। अधिकारी ने बताया था कि सीजीएसटी के एडिशनल कमिश्नर विनय कुमार कंथेटी 16 सितंबर से फरार थे।

वीकेयू/पीएम