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बांग्लादेश: मीरपुर में लगातार तीसरे दिन श्रमिकों और पुलिस के बीच झड़प

ढाका, 3 नवंबर (आईएएनएस)। न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर बांग्लादेश के मीरपुर में प्रदर्शनरत श्रमिकों और पुलिस के बीच लगातार तीसरे दिन झड़प हुई। जिससे यातायात बाधित हुआ और एक मेट्रो स्टेशन को भी कुछ देर के लिए बंद करना पड़ा। स्थानीय मीडिया के अनुसार, हंगामे के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड छोड़े।
 

ढाका, 3 नवंबर (आईएएनएस)। न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर बांग्लादेश के मीरपुर में प्रदर्शनरत श्रमिकों और पुलिस के बीच लगातार तीसरे दिन झड़प हुई। जिससे यातायात बाधित हुआ और एक मेट्रो स्टेशन को भी कुछ देर के लिए बंद करना पड़ा। स्थानीय मीडिया के अनुसार, हंगामे के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड छोड़े।

न्यूज एजेंसी यूएनबी के अनुसार, बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। गाजीपुर, सावर-अशुलिया और नारायणगंज के प्रमुख औद्योगिक इलाकों में सोमवार को हजारों श्रमिक सड़कों पर उतरे। उग्र प्रदर्शन के चलते देश की 264 फैक्ट्रियों में कामकाज ठप पड़ा है।

ढाका ट्रिब्यून ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि मंगलवार को मीरपुर में पुलिस और श्रमिकों के बीच लगातार तीसरे दिन झड़पें हुईं। सुबह करीब 10:15 बजे भिड़ंत हुई जब पुलिस ने मीरपुर-11 इलाके में कर्मचारियों को सड़क जाम करने से रोकने की कोशिश की।

कर्मचारी बीच-बीच में गलियों से बाहर आते और पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंकते देखे गए। जवाब में पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड छोड़े। इस टकराव के दौरान इलाके में तनाव फैल गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

सुबह के समय, श्रमिक अपनी फैक्ट्रियों से बाहर निकल आए और अपने कार्यस्थलों के पास जमा हो गए। कुछ समूह पास की गलियों में भी इकट्ठा हो गए थे।

स्थानीय निवासी और प्रत्यक्षदर्शी यूसुफ अहमद ने 'बांग्ला ट्रिब्यून' को बताया कि मीरपुर-10 और मीरपुर-11 के बीच स्थित कई फैक्ट्रियों के पुरुष और महिला कर्मचारी अपने कार्यस्थलों के बाहर जमा हो गए थे।

प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार टका करने, श्रमिकों की ब्लैकलिस्टिंग बंद करने और छंटनी रोकने की मांग कर रहे हैं। अब तक पुलिस और श्रमिकों के बीच झड़पों में कम से कम 10 लोग घायल हुए, जबकि आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद 264 कपड़ा कारखानों में सामान्य अवकाश घोषित करना पड़ा।

बांग्लादेश के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों का यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है, जब सरकार ने रविवार को न्यूनतम वेतन की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड गठित करने की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने रविवार को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि कपड़ा श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ परिधान उद्योग में उत्पादन और निर्यात भी निर्बाध बनाए रखा जाए। उन्होंने श्रमिक आंदोलन के नाम पर हिंसा, तोड़फोड़ और अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

श्रम एवं रोजगार मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने छह सदस्यीय न्यूनतम वेतन बोर्ड के गठन की घोषणा करते हुए श्रमिकों से सड़कों पर प्रदर्शन करने के बजाय काम पर लौटने की अपील की थी। इसके बावजूद लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन जारी है।

बांग्लादेश का परिधान उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात का एक प्रमुख आधार है। ऐसे में गाजीपुर, सावर-अशुलिया और नारायणगंज जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन बाधित होने और कारखानों के बंद रहने से कपड़ा निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका है।

--आईएएनएस

केआर/