बांग्लादेश में बुद्ध की शिक्षा को मंच पर किया गया जीवंत, भारतीय उच्चायुक्त बने विशेष समारोह का हिस्सा
ढाका, 2 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारत के उच्चायोग (एचसीआई) ने इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र (आईजीसीसी), बांग्लादेश और बौद्ध कल्चरल प्रमोशन सोसाइटी के सहयोग से पवित्र आषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने महात्मा बुद्ध की शिक्षा पर आधारित प्रस्तुतियों की सराहना की।
बांग्लादेश स्थित उच्चायोग ने रविवार को इस कार्यक्रम की कुछ झलकियां सोशल मीडिया पर साझा की। उच्चायुक्त के संबोधन की मुख्य बातें भी बताईं। जारी बयान के अनुसार 29 जुलाई 2026 को संपन्न हुए समारोह में, त्रिवेदी ने "शांति, करुणा और सद्भाव के बारे में भगवान बुद्ध की शाश्वत शिक्षाओं पर प्रकाश डाला और साथ ही भारत और बांग्लादेश के बीच साझा बौद्ध विरासत और अटूट मित्रता को फिर से रेखांकित किया।"
यह कार्यक्रम ढाका स्थित धर्मराजिका बौद्ध मंदिर (महाविहार) में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायियों, सांस्कृतिक हस्तियों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध बांग्लादेशी ओडिसी नृत्यांगना प्रमा अबंतीऔर चटगांव से आए उनके दल द्वारा प्रस्तुत ओडिसी नृत्य-नाटिका 'नमो बुद्धाय' रही। कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण और आकर्षक प्रस्तुति के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों तथा करुणा, अहिंसा और शांति के संदेश को सजीव रूप में मंच पर प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक गरिमा और आध्यात्मिक गहराई प्रदान की।
नृत्य-नाटिका के बाद भगवान बुद्ध के जीवन और उनके दर्शन पर आधारित वृत्तचित्र 'द वे ऑफ बुद्धा' का प्रदर्शन किया गया। फिल्म में भगवान बुद्ध के जीवन, ज्ञान प्राप्ति और मानवता के लिए उनके संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने भारत और बांग्लादेश के बीच साझा बौद्ध विरासत तथा सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और सह-अस्तित्व के संदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
--आईएएनएस
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