बांधवगढ़ में हाथी के बच्चे की संदिग्ध हालात में मौत, एंथ्रेक्स के शक में ताला एलिफेंट कैंप 3 साल के लिए सील
उमरिया, 29 सितंबर (आईएएनएस)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। रिजर्व के ताला एलिफेंट कैंप में एक हाथी के बच्चे की अचानक मौत के बाद पूरे कैंप को तीन साल के लिए सील कर दिया गया है। वन विभाग को आशंका है कि बच्चे की मौत एंथ्रेक्स बीमारी के कारण हुई है।
बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया, "28 अप्रैल को, हमारे कैंप में रहने वाली लगभग 3-4 साल की एक मादा हाथी के बच्चे की अचानक तबीयत खराब हो गई और 5-6 घंटे के अंदर उसकी मौत हो गई।"
उन्होंने बताया कि इलाज करने वाले पशु चिकित्सक ने हाथी के बच्चे में कुछ खास लक्षण देखे, जो एंथ्रेक्स के शुरुआती लक्षणों से मिलते-जुलते थे। फील्ड डायरेक्टर ने कहा, "जैसे मुंह से लगातार खून बहना और खून का थक्का न जमना, ये एंथ्रेक्स के शुरुआती लक्षण हैं।"
घटना के बाद वन विभाग तुरंत हरकत में आया। अनुपम सहाय ने बताया कि उन्होंने तुरंत जबलपुर से विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई और हाथियों की ऐसी संदिग्ध मौतों के लिए एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) द्वारा तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का सख्ती से पालन किया।
उन्होंने कहा, "इस प्रोटोकॉल के तहत, बच्चे की मौत वाली जगह के चारों ओर लगभग 50 मीटर के दायरे में घेरा बना दिया गया है ताकि कोई भी जंगली जानवर उस इलाके में न आ सके। चूंकि एंथ्रेक्स के स्पोर मिट्टी में 3 साल तक जीवित रह सकते हैं, इसलिए हमने उस पूरे इलाके को उतने समय के लिए सील कर दिया है और एसओपी में बताई गई सभी अन्य जरूरतों का पालन कर रहे हैं।"
एंथ्रेक्स एक बेहद खतरनाक संक्रामक बीमारी है जो मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया के स्पोर से फैलती है। इसके स्पोर सालों तक जमीन में जीवित रह सकते हैं और किसी भी जीव के संपर्क में आने पर उसे संक्रमित कर सकते हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर इतने बड़े इलाके को सील करना जरूरी हो जाता है।
फील्ड डायरेक्टर ने इस दौरान एलिफेंट फेस्टिवल को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग पिछले साल से ही नई जगहों पर फेस्टिवल आयोजित करने पर विचार कर रहा था।
उन्होंने कहा, "पहले बांधवगढ़ में सिर्फ कैंप के हाथी ही दिखते थे लेकिन अब जंगली हाथी रिजर्व के लगभग सभी इलाकों में घूम रहे हैं और गांवों तक भी आ रहे हैं, इसलिए हमें अलग-अलग जगहों पर फेस्टिवल आयोजित करना जरूरी लगा। जगह बदलने का मकसद स्थानीय ग्रामीणों के बीच हाथियों की उपयोगिता, वन्यजीव संरक्षण में कैंप के हाथियों की भूमिका और जंगली हाथियों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।"
--आईएएनएस
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