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बकरीद पर इस्लाम में जायज मवेशियों की दें कुर्बानी: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

बरेली, 26 मई (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मंगलवार को आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि बकरीद मुसलमानों का एक बहुत बड़ा त्योहार है, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी को ठेस न पहुंचे। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस्लाम में जायज मवेशियों की ही कुर्बानी दें।
 
बकरीद पर इस्लाम में जायज मवेशियों की दें कुर्बानी: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

बरेली, 26 मई (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मंगलवार को आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि बकरीद मुसलमानों का एक बहुत बड़ा त्योहार है, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी को ठेस न पहुंचे। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस्लाम में जायज मवेशियों की ही कुर्बानी दें।

उन्होंने कहा कि बकरीद मुसलमानों का एक बहुत बड़ा इस्लामिक त्योहार है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो आगे भी जारी रहेगी। उनके मुताबिक, इस्लाम में उन जानवरों की कुर्बानी की अनुमति दी गई है जिन्हें धार्मिक रूप से जायज माना गया है, जैसे बकरा और अन्य मवेशी।

उन्होंने कहा कि भारत में बहुत बड़ी संख्या में लोग गाय को माता के रूप में मानते हैं, और उनसे उनकी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में इस्लाम भी इस बात की इजाजत नहीं देता कि किसी की भावनाओं या धार्मिक विश्वास को ठेस पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि हर धर्म की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है, और समाज में शांति बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है।

मौलाना ने यह भी कहा कि इस्लाम में गाय के दूध को फायदेमंद और शिफा देने वाला बताया गया है, इसलिए उसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक बातों को गलत तरीके से न समझा जाए और सही जानकारी के लिए इस्लाम का अध्ययन किया जाए। उनके अनुसार, कई बार गलत जानकारी की वजह से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें हमेशा सभी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाती हैं, इसलिए हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह कानून का पालन करे। किसी भी धार्मिक गतिविधि को लेकर नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।

मौलाना ने मुसलमानों से खास अपील करते हुए कहा कि बकरीद की कुर्बानी खुले में न की जाए। उन्होंने कहा कि कुर्बानी को घर के अंदर, निर्धारित स्थानों पर या परंपरागत जगहों पर ही किया जाए और उसे ढककर रखा जाए, ताकि किसी और समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

--आईएएनएस

पीआईएम/डीकेपी